शिलांग: मेघालय में रबर की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में INROAD (Indian Natural Rubber Operations for Assisted Development) पहल के तहत प्राकृतिक रबर की खेती का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर में रबर उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों के लिए लंबे समय तक आय का स्थायी स्रोत तैयार करना है। इस पहल के जरिए नए क्षेत्रों को रबर की खेती से जोड़ने, किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने और तकनीकी सहायता देने पर जोर है।
पूर्वोत्तर भारत की जलवायु और वर्षा की स्थिति प्राकृतिक रबर की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसी वजह से मेघालय सहित क्षेत्र के अन्य राज्यों में रबर प्लांटेशन के विस्तार की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
क्या है INROAD परियोजना?
INROAD की शुरुआत पूर्वोत्तर भारत में प्राकृतिक रबर के उत्पादन और खेती के क्षेत्र को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। यह परियोजना रबर बोर्ड और भारतीय टायर उद्योग से जुड़ी कंपनियों के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है।
इसके तहत किसानों को रबर के पौधे उपलब्ध कराने के साथ रोपण, देखभाल और उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी देने की व्यवस्था की जाती है। योजना का उद्देश्य किसानों को केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें रबर उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना है।
मेघालय में बढ़ रहा रबर का क्षेत्र
मेघालय के कई हिस्सों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां रबर के पौधों के लिए उपयुक्त हैं। पर्याप्त वर्षा और गर्म-नम वातावरण के कारण यहां प्राकृतिक रबर उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं।
INROAD के तहत ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर नए किसानों को रबर प्लांटेशन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे उन इलाकों में भी रबर की खेती पहुंच सकती है जहां किसान अभी पारंपरिक फसलों पर अधिक निर्भर हैं।
किसानों को मिलेगा दीर्घकालिक फायदा
रबर एक लंबी अवधि की व्यावसायिक फसल है। पौधा परिपक्व होने में कई वर्ष लेता है, लेकिन टैपिंग शुरू होने के बाद लंबे समय तक लेटेक्स का उत्पादन किया जा सकता है। ऐसे में सही प्रबंधन और बाजार उपलब्ध होने पर यह किसानों के लिए नियमित आय का स्रोत बन सकता है।
हालांकि शुरुआती वर्षों में किसानों को दूसरी फसलों या आय के विकल्प की जरूरत रहती है। इसलिए रबर के पौधे छोटे रहने के दौरान उपयुक्त अंतरवर्ती फसलें उगाने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
भारत में प्राकृतिक रबर की बढ़ रही जरूरत
भारत में ऑटोमोबाइल और टायर उद्योग प्राकृतिक रबर के बड़े उपभोक्ताओं में शामिल हैं। घरेलू उत्पादन और मांग के बीच अंतर होने पर देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में पूर्वोत्तर में रबर उत्पादन बढ़ने से घरेलू आपूर्ति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
मेघालय में खेती का विस्तार इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। इससे स्थानीय किसानों को बाजार से जोड़ने के साथ देश में प्राकृतिक रबर की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य भी पूरा किया जा सकता है।
रोजगार के भी बन सकते हैं अवसर
रबर की खेती का विस्तार केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। पौधशाला, टैपिंग, लेटेक्स संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण जैसे कामों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके लिए प्रशिक्षित श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
INROAD के तहत मेघालय में रबर की खेती का बढ़ता दायरा राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। हालांकि सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों को पौधरोपण से लेकर उत्पादन और बिक्री तक पर्याप्त तकनीकी सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए।
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