इंफाल। मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में बड़ा आंकड़ा पेश किया है। मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने गुरुवार को सदन को बताया कि राज्य में हुई जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं।
गृह मंत्री ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसा ने राज्य में बड़े पैमाने पर जनहानि और नुकसान पहुंचाया है। हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
मणिपुर में जातीय संघर्ष की शुरुआत 3 मई 2023 को हुई थी। पहाड़ी जिलों में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में आदिवासी एकजुटता मार्च आयोजित किया गया था। इसी दौरान तनाव बढ़ा और देखते ही देखते हिंसा भड़क उठी।
इसके बाद राज्य के कई हिस्सों में हिंसक घटनाएं हुईं। आगजनी, गोलीबारी और आपसी संघर्ष की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। कई परिवार प्रभावित हुए और हजारों लोगों को राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने विधानसभा में बताया कि सरकार हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति सुधारने के प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि हिंसा के दौरान लापता हुए लोगों की तलाश के लिए प्रयास जारी हैं। 49 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बनी हुई है।
मणिपुर हिंसा को लेकर राज्य और केंद्र सरकार लगातार स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती, राहत कार्य और शांति बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं।
हिंसा के बाद राज्य में कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों को तैनात किया गया ताकि आगे की हिंसा को रोका जा सके।
जातीय संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित होना पड़ा। कई लोगों ने राहत शिविरों में महीनों तक जीवन बिताया। सरकार और प्रशासन की ओर से इन शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए।
मणिपुर हिंसा को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी लगातार चर्चा होती रही है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर स्थिति संभालने में विफल रहने के आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि शांति बहाली के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
विधानसभा में गृह मंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश जारी है। हिंसा के कारण प्रभावित समुदायों के बीच विश्वास बहाली भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चले जातीय संघर्ष के बाद केवल सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि दोनों समुदायों के बीच संवाद और भरोसा कायम करना भी जरूरी है।
मणिपुर की स्थिति को लेकर देशभर में चिंता जताई गई थी। हिंसा के शुरुआती दिनों में कई क्षेत्रों में तनाव काफी बढ़ गया था। हालांकि समय के साथ कई इलाकों में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन पूरी तरह शांति स्थापित करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
गृह मंत्री ने विधानसभा में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास पर ध्यान दिया जा रहा है।
राज्य सरकार के सामने अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाना, प्रभावित परिवारों को सहायता देना और स्थायी शांति स्थापित करना है।
मणिपुर हिंसा के आंकड़े सामने आने के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। 306 मौतों और 49 लोगों के लापता होने की जानकारी ने संघर्ष की गंभीरता को उजागर किया है।
फिलहाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।