मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में भाषा नियम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। देवेंद्र फडणवीस सरकार के एक फैसले के विरोध में सोमवार को ऑटो और टैक्सी चालकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। कांदिवली लिंक रोड पर चालकों ने रास्ता रोको आंदोलन किया, जिसके कारण इलाके में भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। हालात को देखते हुए पुलिस ने मौके पर बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती की।
बताया जा रहा है कि यह विरोध महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को लेकर है, जिसमें ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट धारकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य किया गया है। सरकार का तर्क है कि राज्य की आधिकारिक भाषा को बढ़ावा देने और यात्रियों से बेहतर संवाद के लिए यह नियम जरूरी है। वहीं, कई गैर-मराठी भाषी चालकों का कहना है कि इस नियम से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है।
कांदिवली लिंक रोड पर जमकर प्रदर्शन
कांदिवली लिंक रोड के लालजीपाड़ा इलाके में सुबह करीब 9 बजे दर्जनों ऑटो और टैक्सी चालकों ने एकजुट होकर प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर रास्ता रोक दिया, जिससे व्यस्त समय में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। बड़ी संख्या में वाहन जाम में फंस गए और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से मुंबई में रहकर ऑटो और टैक्सी चला रहे हैं। उनका आरोप है कि मराठी भाषा की अनिवार्यता के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। कई चालकों ने कहा कि वे मराठी को समझते हैं और रोजमर्रा के काम में इसका इस्तेमाल भी करते हैं, लेकिन भाषा परीक्षा या सख्त नियमों के कारण उनके सामने नई मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।
चालकों ने बताई अपनी परेशानी
विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि उनमें से कई लोग कम पढ़े-लिखे हैं और वर्षों से मुंबई में मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक भाषा संबंधी नियम लागू होने से उनके रोजगार पर संकट पैदा हो सकता है।
कुछ चालकों ने आरोप लगाया कि मराठी भाषा की जांच के दौरान उन्हें परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि भाषा सीखने के लिए समय और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, न कि सीधे कार्रवाई या नोटिस की प्रक्रिया शुरू की जाए।
सरकार का क्या कहना है?
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि मराठी राज्य की आधिकारिक भाषा है और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए इसका ज्ञान जरूरी है। सरकार के अनुसार, इस नियम का उद्देश्य किसी समुदाय को परेशान करना नहीं बल्कि यात्रियों और वाहन चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है।
परिवहन विभाग की ओर से भाषा क्षमता की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कई चालकों को मराठी में पर्याप्त दक्षता नहीं होने पर नोटिस भी जारी किए गए हैं। इसी कार्रवाई के बाद ऑटो और टैक्सी यूनियनों में नाराजगी बढ़ गई है।
सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात
प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई पुलिस ने मौके पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और यातायात व्यवस्था सामान्य करने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया।
प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शन के कारण आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। वहीं, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
भाषा विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
महाराष्ट्र में भाषा का मुद्दा पहले भी कई बार राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। मराठी भाषा और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं। इस बार ऑटो-टैक्सी चालकों से जुड़े नियम ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
राजनीतिक दल भी इस मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसे आम लोगों और प्रवासी कामगारों के लिए परेशानी वाला कदम बता रहे हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालकों का विरोध जारी है। सरकार और चालकों के बीच बातचीत से ही इस विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद है। चालकों की मांग है कि नियमों में राहत दी जाए और भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
वहीं, सरकार का कहना है कि नियम राज्य की भाषा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई बदलाव करती है।
Tags: