भिवंडी। महाराष्ट्र के भिवंडी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक जाम अब वाहन चालकों के लिए रोज की परेशानी बनता जा रहा है। शहर को अंजुरफाटा, मनकोली, पिंपलास, कल्याण और राजनोली से जोड़ने वाली प्रमुख सड़कों पर दिन के कई समय लंबी कतारें लग रही हैं। भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही, खराब और गड्ढों वाली सड़कें, संकरी लेन और जगह-जगह चल रहे अधूरे निर्माण कार्यों के कारण यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

भिवंडी देश के प्रमुख वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में शामिल है। शहर और इसके आसपास लगातार नए गोदाम और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होने से ट्रकों और अन्य भारी वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन गुजरात और दूसरे राज्यों से भिवंडी के गोदामों तक पहुंचते हैं। इसके कारण पहले से दबाव झेल रही सड़कों पर यातायात का भार और बढ़ गया है।

अंजुरफाटा-मनकोली मार्ग पर सबसे ज्यादा दबाव

गुजरात से भिवंडी की ओर आने वाले कई भारी वाहन स्टेट हाईवे के चिंचोटी-अंजुरफाटा-मनकोली हिस्से का इस्तेमाल करते हैं। यह मार्ग भिवंडी के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है। हालांकि, मौजूदा समय में सड़क पर कंक्रीट बिछाने का काम चल रहा है।

निर्माण कार्य के कारण कई जगह सड़क की चौड़ाई कम हो गई है। कुछ हिस्सों में सड़क की सतह खराब है, जबकि कहीं-कहीं वाहनों के गुजरने के लिए सीमित जगह ही बचती है। भारी वाहनों के साथ छोटे वाहन भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यातायात का दबाव और बढ़ जाता है।

अंजुरफाटा के पास सड़क के संकरे हो जाने के कारण वाहनों की रफ्तार काफी कम हो जाती है। जब एक साथ बड़ी संख्या में ट्रक और अन्य वाहन इस हिस्से से गुजरते हैं तो कुछ ही समय में लंबी कतार लग जाती है। इसका असर आसपास के दूसरे मार्गों पर भी देखने को मिलता है।

रेलवे लाइन के नीचे सिंगल लेन रास्ता

अंजुरफाटा से आगे बढ़ने पर यातायात की समस्या और गंभीर हो जाती है। वाहनों को रेलवे लाइन के नीचे बने एक सिंगल-लेन रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। दोनों दिशाओं से आने वाले वाहनों के लिए सीमित जगह होने के कारण यहां अक्सर यातायात की रफ्तार बेहद धीमी हो जाती है।

भारी ट्रकों के इस हिस्से में प्रवेश करने पर समस्या और बढ़ जाती है। एक बड़े वाहन को निकलने में अधिक समय लगने के कारण पीछे वाहनों की कतार बनती चली जाती है। यदि विपरीत दिशा से भी भारी वाहन आ जाएं तो जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।

इसका असर केवल मालवाहक वाहनों पर नहीं पड़ता। रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले स्थानीय निवासी, दोपहिया वाहन चालक, कर्मचारी और छोटे व्यापारी भी जाम में फंसते हैं।

वेयरहाउस की बढ़ती संख्या बनी चुनौती

भिवंडी पिछले कुछ वर्षों में बड़े वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स हब के केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हुआ है। मुंबई महानगर क्षेत्र के नजदीक होने के कारण यहां बड़ी कंपनियों ने माल भंडारण और वितरण के लिए गोदाम बनाए हैं।

ई-कॉमर्स और संगठित रिटेल के विस्तार के साथ भिवंडी में माल की आवाजाही भी बढ़ी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से सामान लेकर आने वाले ट्रक यहां पहुंचते हैं और फिर मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली तथा आसपास के क्षेत्रों में माल की आपूर्ति करते हैं।

लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में बढ़ोतरी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाया है, लेकिन इसके साथ सड़कों और यातायात व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गति से गोदाम और लॉजिस्टिक्स केंद्र बढ़े हैं, उसी अनुपात में सड़क और यातायात सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ।

गड्ढों और खराब सड़क से भी परेशानी

जाम की एक बड़ी वजह सड़क की खराब स्थिति भी है। कई हिस्सों में गड्ढे हैं, जिसके कारण वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ता है। भारी वाहन जब गड्ढों से होकर गुजरते हैं तो उनकी रफ्तार और कम हो जाती है।

कई जगह सड़क निर्माण और कंक्रीटीकरण का काम चल रहा है। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण वाहनों के लिए उपलब्ध जगह सीमित है। ऐसे में यदि किसी हिस्से में ट्रक खराब हो जाए या कोई दुर्घटना हो जाए तो यातायात पूरी तरह ठप होने की स्थिति बन सकती है।

कल्याण और राजनोली तक पहुंचता है असर

भिवंडी में यातायात की समस्या केवल शहर के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं है। अंजुरफाटा और मनकोली की ओर लगने वाला जाम कई बार आगे के मार्गों को भी प्रभावित करता है। पिंपलास, कल्याण और राजनोली की ओर जाने वाले वाहन भी इस दबाव का सामना करते हैं।

सुबह और शाम के व्यस्त समय में स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। काम पर जाने वाले लोगों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही एक साथ बढ़ने के कारण सड़क पर वाहनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है।

जाम के कारण वाहन चालकों का समय बर्बाद होने के साथ ईंधन की खपत भी बढ़ती है। माल परिवहन से जुड़े कारोबारियों के लिए देरी का सीधा असर डिलीवरी समय और परिचालन लागत पर पड़ सकता है।

स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय वाहन चालक और निवासी चाहते हैं कि प्रशासन यातायात समस्या का स्थायी समाधान निकाले। उनका कहना है कि केवल जाम लगने के बाद यातायात पुलिस की तैनाती पर्याप्त नहीं है। सड़क की क्षमता बढ़ाने, निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने और भारी वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की जरूरत है।

विशेष रूप से सिंगल-लेन रेलवे अंडरपास जैसे संवेदनशील हिस्सों पर वैकल्पिक मार्ग या चौड़ीकरण की व्यवस्था की मांग उठ रही है। साथ ही अंजुरफाटा के संकरे हिस्से को चौड़ा करना भी जरूरी बताया जा रहा है।

यदि सड़क निर्माण कार्य पूरा हो जाए और मार्ग की क्षमता बढ़ाई जाए तो यातायात का दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। इसके अलावा वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए बेहतर ट्रैफिक प्लानिंग की जरूरत है।

भिवंडी के लिए लॉजिस्टिक्स सेक्टर आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है, लेकिन बढ़ते माल परिवहन के साथ सड़क और यातायात ढांचे को भी उसी अनुपात में विकसित करना जरूरी है। फिलहाल संकरी सड़कें, गड्ढे, निर्माणाधीन हिस्से और सिंगल-लेन रास्ते मिलकर वाहन चालकों के लिए रोजाना जाम की समस्या पैदा कर रहे हैं। यदि समय रहते बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं किया गया तो बढ़ती लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के साथ यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है।

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