महाराष्ट्र

सांप के काटने से 3 छात्राओं की मौत, 500 आश्रम स्कूलों का ऑडिट

Kavita2
11 Aug 2026 3:55 PM IST
सांप के काटने से 3 छात्राओं की मौत, 500 आश्रम स्कूलों का ऑडिट
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गढ़चिरौली। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में आदिवासी छात्राओं के लिए संचालित आवासीय आश्रम स्कूल में सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को जपतालई गांव स्थित संबंधित आश्रम स्कूल का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने का निर्देश दिया। घटना के बाद सरकार ने राज्यभर में आदिवासी बच्चों के लिए चल रहे 500 से अधिक आश्रम और आवासीय स्कूलों का थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का भी फैसला किया है।

रविवार आधी रात हुई इस घटना में एक जहरीले सांप ने छात्राओं को उस समय काट लिया, जब वे स्कूल के छात्रावास में सो रही थीं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, कुल छह छात्राएं सांप के काटने से प्रभावित हुईं। इनमें से तीन की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य का इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री ने दिए कड़े कार्रवाई के निर्देश

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने जपतालई स्थित आश्रम स्कूल का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही उस अधिकारी पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिसने हाल ही में स्कूल का निरीक्षण किया था। बताया गया है कि निरीक्षण के दौरान स्कूल में कुछ कमियां सामने आने के बावजूद अधिकारी ने कथित तौर पर संतोषजनक रिपोर्ट दी थी। मुख्यमंत्री ने इस अधिकारी को निलंबित करने का निर्देश दिया है।

सरकार के इस फैसले से साफ है कि घटना को केवल एक आकस्मिक हादसे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था और निरीक्षण प्रणाली में संभावित लापरवाही की भी जांच की जाएगी।

कैबिनेट बैठक में उठा मामला

महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट बैठक में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने गढ़चिरौली की घटना की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में छात्राओं की मौत और स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई।

घटना के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवासीय स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्धारित इंतजाम कितने प्रभावी थे। छात्रावास में जहरीले सांप के पहुंचने और छात्राओं को काटने की घटना ने दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में संचालित आवासीय स्कूलों की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

500 से ज्यादा आश्रम स्कूलों का थर्ड-पार्टी ऑडिट

गढ़चिरौली की घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में आदिवासी बच्चों के लिए चल रहे 500 से अधिक आश्रम और आवासीय स्कूलों का थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है।

इस ऑडिट का उद्देश्य स्कूलों और छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा, भवनों की स्थिति, साफ-सफाई, बिजली, पानी, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और आसपास के पर्यावरण से जुड़े जोखिमों का स्वतंत्र मूल्यांकन करना होगा।

खास तौर पर उन स्कूलों पर ध्यान देने की जरूरत होगी, जो जंगलों या घने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। ऐसे इलाकों में सांप और अन्य जहरीले जीवों का खतरा सामान्य शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक हो सकता है। इसलिए छात्रावासों की संरचना और सुरक्षा उपायों की नियमित जांच जरूरी है।

छह छात्राओं को सांप ने काटा

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, रविवार देर रात छात्रावास में सो रही छह आदिवासी छात्राएं सांप के काटने से प्रभावित हुईं। इनमें तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद स्कूल और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने जांच शुरू की। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सांप छात्रावास के अंदर कैसे पहुंचा और क्या वहां पहले से ऐसी स्थिति से बचाव के लिए कोई सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे।

निरीक्षण व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस घटना ने स्कूलों के नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी अधिकारी ने हाल ही में स्कूल का निरीक्षण किया था और इसके बावजूद मुख्यमंत्री को उस अधिकारी को निलंबित करने का निर्देश देना पड़ा, तो इससे निरीक्षण की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्कूलों का निरीक्षण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्थिति की वास्तविक जांच पर आधारित होना जरूरी है। छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा से जुड़े छोटे से छोटे जोखिम को भी गंभीरता से लेना आवश्यक है।

आदिवासी बच्चों की सुरक्षा सरकार के लिए चुनौती

महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में बड़ी संख्या में बच्चे आवासीय आश्रम स्कूलों में रहकर शिक्षा प्राप्त करते हैं। इनमें से कई स्कूल दूरदराज और वन क्षेत्रों में स्थित हैं। बच्चों के लिए ये संस्थान केवल स्कूल नहीं बल्कि उनका आवास भी होते हैं। इसलिए यहां सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

ऐसे स्कूलों में रात के समय पर्याप्त रोशनी, सुरक्षित भवन, खिड़की-दरवाजों की व्यवस्था, साफ-सफाई, नियमित कीट नियंत्रण और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।

गढ़चिरौली की घटना के बाद होने वाला थर्ड-पार्टी ऑडिट यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि राज्य के अन्य आश्रम स्कूलों में भी ऐसी कोई गंभीर कमी तो नहीं है। यदि कमियां मिलती हैं तो उन्हें समय रहते दूर करना जरूरी होगा।

जांच से सामने आएगी लापरवाही की तस्वीर

फिलहाल सरकार ने स्कूल का लाइसेंस रद्द करने और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन इस घटना की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच में यह देखा जा सकता है कि छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी, क्या स्कूल प्रशासन को पहले से किसी सांप या अन्य जहरीले जीव की मौजूदगी की जानकारी थी और क्या बच्चों के लिए आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर्याप्त थी।

साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बाकी तीन छात्राओं की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और उनके इलाज में किसी तरह की कमी न रहे।

तीन छात्राओं की मौत ने आदिवासी बच्चों के लिए संचालित आवासीय स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्कूल का लाइसेंस रद्द करने और राज्य के 500 से अधिक आश्रम स्कूलों का थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने का फैसला सरकार की ओर से कड़ा संदेश माना जा रहा है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि इस ऑडिट के बाद सामने आने वाली कमियों को कितनी तेजी से दूर किया जाता है, ताकि भविष्य में किसी छात्र या छात्रा की जान ऐसी लापरवाही या सुरक्षा चूक के कारण न जाए।

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