पुणे। सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर दोस्ती और फिर निवेश के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। पुणे साइबर पुलिस ने एक 25 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर कथित तौर पर Snapchat पर ‘प्रिंसिका जोशी’ नाम से महिला की फर्जी प्रोफाइल बनाकर एक व्यक्ति से दोस्ती करने और उसे क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से मोटे मुनाफे का लालच देकर करीब 1.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान पुणे के पार्वती इलाके के रहने वाले कुणाल जितेंद्र अडमाने (25) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर महिला की पहचान का इस्तेमाल करते हुए शिकायतकर्ता का भरोसा हासिल किया। दोनों करीब छह से सात महीने तक Snapchat और फोन कॉल के जरिए संपर्क में रहे। इसी दौरान शिकायतकर्ता को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमाने का झांसा दिया गया।

‘प्रिंसिका जोशी’ के नाम से आई फ्रेंड रिक्वेस्ट

मामले की शुरुआत तब हुई जब शिकायतकर्ता के Snapchat अकाउंट पर ‘प्रिंसिका जोशी’ नाम की प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई।

शिकायतकर्ता ने इसे एक महिला का अकाउंट समझकर रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई और धीरे-धीरे कथित दोस्ती गहरी होती चली गई।

पुलिस के मुताबिक इस बातचीत का सिलसिला कुछ दिनों या हफ्तों तक नहीं बल्कि कई महीनों तक चला। इसी लंबे संपर्क के कारण शिकायतकर्ता को अकाउंट चलाने वाले व्यक्ति पर भरोसा हो गया।

छह-सात महीने तक संपर्क में रहा आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया कि संदिग्ध करीब छह से सात महीने तक शिकायतकर्ता के संपर्क में रहा। Snapchat पर बातचीत के अलावा फोन कॉल के जरिए भी संपर्क किया जाता था।

लंबे समय तक बातचीत के कारण शिकायतकर्ता को इस बात का संदेह नहीं हुआ कि जिस व्यक्ति से वह बात कर रहा है, उसकी सोशल मीडिया पहचान कथित तौर पर फर्जी है।

पुलिस का आरोप है कि इसी भरोसे का इस्तेमाल बाद में आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया गया।

क्रिप्टो में बड़े मुनाफे का दिया लालच

शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने के बाद कथित ‘प्रिंसिका जोशी’ ने बातचीत के दौरान क्रिप्टोकरेंसी में निवेश की बात शुरू की।

आरोप है कि शिकायतकर्ता को बताया गया कि क्रिप्टोकरेंसी में पैसा लगाने से उसे भारी मुनाफा और अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

लगातार संपर्क और दोस्ती के कारण शिकायतकर्ता ने इस निवेश प्रस्ताव पर भरोसा कर लिया। इसके बाद अलग-अलग तरीके से उससे करीब डेढ़ लाख रुपये लिए जाने का आरोप है।

करीब 1.5 लाख रुपये गंवाए

पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता ने कथित निवेश और बेहतर रिटर्न की उम्मीद में करीब 1.5 लाख रुपये दे दिए।

लेकिन बाद में जब उसे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला और पूरे मामले पर संदेह हुआ तो उसने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

शिकायत मिलने के बाद पुणे साइबर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। डिजिटल माध्यम से हुई बातचीत और अन्य तकनीकी जानकारियों को खंगाला गया।

साइबर पुलिस ने खोली फर्जी पहचान

जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Snapchat पर इस्तेमाल की जा रही ‘प्रिंसिका जोशी’ की पहचान का पता लगाना था।

साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए इस प्रोफाइल के पीछे मौजूद संदिग्ध तक पहुंचने का दावा किया। जांच में पुलिस पार्वती इलाके के रहने वाले कुणाल जितेंद्र अडमाने तक पहुंची।

इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल किस तरह किया गया और धोखाधड़ी की पूरी रकम कहां गई।

महिला की पहचान बनाकर जीता भरोसा

इस मामले में ठगी का तरीका भी ध्यान खींचने वाला है। आरोपी पर आरोप है कि उसने सीधे निवेश का प्रस्ताव भेजने के बजाय पहले महिला की फर्जी पहचान बनाकर दोस्ती की।

कई महीनों तक लगातार बातचीत के जरिए शिकायतकर्ता का विश्वास हासिल किया गया और उसके बाद निवेश की बात सामने रखी गई।

साइबर ठगी के मामलों में भरोसा हासिल करने की यह रणनीति पीड़ित के लिए फर्जी और वास्तविक पहचान के बीच अंतर करना मुश्किल बना सकती है।

सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल का खतरा

यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को भी सामने लाता है।

किसी प्रोफाइल में इस्तेमाल की गई तस्वीर, नाम और दूसरी जानकारी देखकर यह मान लेना सुरक्षित नहीं है कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है।

फर्जी अकाउंट के जरिए लंबे समय तक बातचीत करके विश्वास हासिल किया जा सकता है और बाद में पैसे, निवेश या निजी जानकारी की मांग की जा सकती है।

क्रिप्टो के नाम पर ठगी से रहें सतर्क

क्रिप्टोकरेंसी और दूसरे ऑनलाइन निवेश विकल्पों में ऊंचे रिटर्न का लालच देकर ठगी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।

यदि कोई अनजान व्यक्ति कम समय में भारी मुनाफे या सुनिश्चित रिटर्न का दावा करता है तो ऐसे प्रस्ताव को लेकर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

किसी व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर करने से पहले निवेश प्लेटफॉर्म और संबंधित व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना महत्वपूर्ण है।

डिजिटल सबूतों की जांच

पुणे साइबर पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और वित्तीय लेनदेन से जुड़े डिजिटल सबूतों की जांच कर सकती है।

इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शिकायतकर्ता से मिली रकम कहां भेजी गई और क्या इस तरह के दूसरे अकाउंट भी इस्तेमाल किए गए थे।

पुलिस के लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या आरोपी ने केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाया या इसी तरीके से अन्य लोगों से भी संपर्क किया था।

अन्य पीड़ितों की संभावना की भी जांच

फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए कई महीनों तक संपर्क रखने की बात सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ सकता है।

पुलिस यह पता लगा सकती है कि संदिग्ध के संपर्क में और कितने लोग थे तथा क्या किसी अन्य व्यक्ति से भी निवेश या पैसे की मांग की गई थी।

यदि जांच में अन्य शिकायतें या लेनदेन सामने आते हैं तो मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।

अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले सावधानी

साइबर सुरक्षा के लिहाज से यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले प्रोफाइल की विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।

खासकर जब ऑनलाइन दोस्ती के बाद कोई व्यक्ति निवेश, लोन, गिफ्ट या किसी दूसरी वजह से पैसे मांगने लगे तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।

वीडियो कॉल या दूसरे विश्वसनीय माध्यम से पहचान सत्यापित किए बिना किसी को बड़ी रकम भेजना जोखिम भरा हो सकता है।

जांच में जुटी साइबर पुलिस

फिलहाल पुणे साइबर पुलिस ने कथित फर्जी पहचान का पता लगाकर 25 वर्षीय कुणाल जितेंद्र अडमाने को गिरफ्तार किया है। उस पर ‘प्रिंसिका जोशी’ बनकर शिकायतकर्ता से दोस्ती करने और क्रिप्टोकरेंसी में मोटे मुनाफे का लालच देकर करीब 1.5 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है।

अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि फर्जी प्रोफाइल किस तरह संचालित की जा रही थी, पैसे का क्या हुआ और क्या इस कथित ठगी के तार अन्य मामलों से भी जुड़े हैं।

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