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पुणे। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से पहले तेज आवाज वाले DJ सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने DJ सिस्टम से होने वाले शोर की तुलना भूकंप जैसी आवाज से करते हुए लोगों से गणपति उत्सव को पारंपरिक तरीके से मनाने की अपील की है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस विषय पर किसी तरह का टकराव पैदा करने के बजाय लोगों को भरोसे में लेकर आम सहमति बनाई जानी चाहिए, ताकि उत्सव की परंपरा और उल्लास दोनों कायम रहें।
शुक्रवार को पुणे में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “DJ सिस्टम से होने वाला शोर भूकंप के शोर जैसा होता है। मेरा मानना है कि लोगों को भरोसे में लिया जाना चाहिए और इस बात पर आम सहमति बनाई जानी चाहिए कि गणपति का त्योहार पारंपरिक तरीके से कैसे मनाया जाए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में विभिन्न त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान DJ सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन पारंपरिक तरीके से त्योहार मनाने का अपना अलग आनंद और महत्व है।
पारंपरिक तरीके से गणेशोत्सव मनाने की अपील
फडणवीस ने लोगों से गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र की पुरानी परंपराओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उनका कहना था कि त्योहारों की वास्तविक खुशी उनकी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी होती है।
गणेशोत्सव महाराष्ट्र के सबसे बड़े और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। राज्य के अलग-अलग शहरों और गांवों में सार्वजनिक गणेश मंडलों के साथ बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी भगवान गणेश की स्थापना करते हैं।
इस दौरान पूजा, आरती, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विसर्जन यात्राएं आयोजित होती हैं।
DJ सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता
पिछले कुछ वर्षों में गणेशोत्सव समेत विभिन्न त्योहारों की शोभायात्राओं और विसर्जन कार्यक्रमों में बड़े DJ सिस्टम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
शक्तिशाली स्पीकर और तेज बेस के कारण कई बार आसपास के क्षेत्रों में काफी तेज आवाज सुनाई देती है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने DJ के शोर की तुलना भूकंप जैसी आवाज से की।
उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि त्योहार का उत्साह बरकरार रखते हुए शोर को लेकर भी संतुलन बनाया जाना चाहिए।
लोगों को भरोसे में लेने पर जोर
मुख्यमंत्री ने केवल DJ के इस्तेमाल पर चिंता नहीं जताई बल्कि इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाए, इस पर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि लोगों को भरोसे में लेकर इस विषय पर आम सहमति बनाना जरूरी है। इसका मतलब यह है कि प्रशासन, गणेश मंडल और नागरिक आपसी बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकालें जिससे त्योहार की भव्यता भी बनी रहे और अनावश्यक शोर से लोगों को परेशानी भी न हो।
फडणवीस ने इस मुद्दे को सामाजिक सहमति से हल करने पर जोर दिया।
परंपरा में ही त्योहार का असली आनंद
मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहार जब पारंपरिक तरीके से मनाए जाते हैं तो उनकी खुशी और बढ़ जाती है।
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की लंबी सांस्कृतिक परंपरा रही है। ढोल-ताशे, लेझीम, भजन और पारंपरिक संगीत लंबे समय से गणेशोत्सव की शोभायात्राओं का हिस्सा रहे हैं।
आधुनिक DJ सिस्टम के आने के बाद उत्सवों में तेज इलेक्ट्रॉनिक संगीत का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके बावजूद कई मंडल आज भी पारंपरिक ढोल-ताशा पथकों के साथ गणपति का स्वागत और विसर्जन करते हैं।
गणेशोत्सव की तैयारियां तेज
गणेशोत्सव को लेकर महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में तैयारियां तेज हो जाती हैं। मुंबई और पुणे समेत विभिन्न शहरों में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गणेश मंडल आयोजन करते हैं।
पंडालों में दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और विसर्जन के दिन बड़े जुलूस निकाले जाते हैं।
ऐसे आयोजनों में भीड़ और यातायात प्रबंधन के साथ ध्वनि नियंत्रण भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहता है।
शोर से आम लोगों को होती है परेशानी
तेज आवाज वाले DJ सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर शिकायतें भी सामने आती रही हैं। विशेष रूप से अस्पतालों, स्कूलों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों वाले इलाकों में तेज आवाज लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
इसी कारण त्योहारों के दौरान ध्वनि से जुड़े नियमों के पालन पर प्रशासन की नजर रहती है।
मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब गणेशोत्सव से पहले मंडलों और प्रशासन की तैयारियां महत्वपूर्ण चरण में पहुंच रही हैं।
ढोल-ताशा महाराष्ट्र की पुरानी पहचान
महाराष्ट्र के गणेशोत्सव में पारंपरिक ढोल-ताशा का विशेष महत्व रहा है। पुणे में तो कई प्रसिद्ध ढोल-ताशा पथक गणेशोत्सव के दौरान अपनी प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं।
इन पथकों में बड़ी संख्या में युवा हिस्सा लेते हैं और महीनों पहले से अभ्यास शुरू कर देते हैं।
पारंपरिक संगीत के जरिए गणपति बप्पा का स्वागत और विसर्जन महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है।
आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन
फडणवीस के बयान को आधुनिक उत्सव संस्कृति और पारंपरिक आयोजन के बीच संतुलन बनाने की अपील के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में त्योहारों के दौरान DJ सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन साथ ही लोगों को परंपरागत तरीके से उत्सव मनाने के लिए प्रेरित किया।
इसमें किसी व्यवस्था को थोपने के बजाय सामाजिक सहमति बनाने की बात कही गई है।
गणेश मंडलों की भूमिका अहम
गणेशोत्सव को पारंपरिक और अनुशासित तरीके से मनाने में सार्वजनिक गणेश मंडलों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
यदि मंडल स्वयं तेज आवाज वाले DJ सिस्टम के बजाय पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता देते हैं तो इसका व्यापक असर दिखाई दे सकता है।
इसके लिए स्थानीय प्रशासन और मंडलों के बीच संवाद भी जरूरी माना जा रहा है।
उत्सव भी हो और दूसरों को परेशानी भी न हो
गणेशोत्सव श्रद्धा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक उत्सव का अवसर है। बड़ी संख्या में लोग इसमें परिवार के साथ शामिल होते हैं। ऐसे में आयोजन के दौरान यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि उत्सव के कारण दूसरे नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।
फडणवीस ने इसी भावना के साथ लोगों से पारंपरिक तरीके अपनाने की अपील की है।
फडणवीस के बयान से DJ पर नई बहस
गणेशोत्सव से ठीक पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान के बाद DJ सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। खासकर उनका यह कहना कि DJ का शोर ‘भूकंप के शोर जैसा’ होता है, ध्यान खींचने वाला बयान है।
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि समाधान लोगों को भरोसे में लेकर और आम सहमति से निकाला जाना चाहिए। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य के गणेश मंडल और स्थानीय प्रशासन इस अपील पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
मुख्यमंत्री का संदेश यही है कि गणपति उत्सव का उत्साह पूरी तरह कायम रहे, लेकिन उसे महाराष्ट्र की समृद्ध परंपराओं और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाया जाए।





