Maharashtra महाराष्ट्र: राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने बुधवार को दावा किया कि ओमप्रकाश राजे भूपालसिंह निंबालकर (ओमराजे निंबालकर) को उनके पिता पवन राजे निंबालकर की हत्या के मामले में “पक्ष में फैसला” दिलाने का लालच देकर शिवसेना (UBT) से अलग करने की कोशिश की गई।

संजय राउत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आने की संभावना भी बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील मामलों को प्रभावित करने की कोशिशें की जाती रही हैं।

ओमराजे निंबालकर, जो इसी नाम से अधिक जाने जाते हैं, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के उस्मानाबाद (धाराशिव) लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वे वर्तमान में क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

गौरतलब है कि ओमराजे निंबालकर के पिता पवन राजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काज़ी की 3 जून 2006 को रायगढ़ जिले के कलंबोली क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला उस समय राज्य की राजनीति और कानून व्यवस्था में चर्चा का बड़ा विषय बना था।

संजय राउत के बयान में यह भी संकेत दिया गया कि इस पुराने मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाने या प्रभावित करने की कोशिशें हुईं। हालांकि, इस संबंध में किसी अन्य पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर से तेज होने की संभावना जताई जा रही है। शिवसेना (UBT) और अन्य राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर आगे प्रतिक्रिया आने की उम्मीद है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को और अधिक गर्म कर सकते हैं, खासकर जब विभिन्न दलों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है और सभी की नजरें संबंधित दलों की आगामी प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।

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