Pune पुणे: छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाए जाने के बाद शिवभक्तों और विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस प्रदर्शन को लेकर NCP (शरद पवार गुट) सांसद निलेश ज्ञानदेव लांके ने कहा कि यह स्थान पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है और इसका ऐतिहासिक महत्व है। सांसद लांके ने कहा, "यह जगह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उमाजी नाइक से प्रेरित है, जिन्होंने देश के लिए अपने खून का बलिदान दिया। यहाँ पर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को प्रशासन द्वारा हटाकर कहीं और ले जाया गया। इसके बाद सभी शिवभक्त और शिव प्रेमी संगठन सुबह से ही यहाँ धरने पर बैठे हैं और विरोध जता रहे हैं।"
स्थानीय शिवभक्त संगठनों ने कहा कि प्रतिमा का हटाया जाना न केवल भावनात्मक रूप से आहत करने वाला है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को भी प्रभावित करता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि प्रतिमा को पहले की जगह पर ही स्थापित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसे कदम उठाने से पहले समाज और संगठनों से विचार विमर्श किया जाए। लांके ने कहा कि इस प्रकार के कदम सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला साबित हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से सुना जाए और युवाओं और शिवभक्तों की भावनाओं का सम्मान किया जाए।
वहीं, पुरातत्व विभाग ने बताया कि प्रतिमा को किसी अन्य सुरक्षित और अधिक उपयुक्त स्थान पर रखा गया है। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम संरक्षण और प्रशासनिक दृष्टिकोण से आवश्यक था। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोग प्रतिमा को पहले की जगह पर लौटाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर भारी संख्या में शिवभक्त और स्थानीय नागरिक मौजूद हैं। इस घटना से पुणे में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर बहस तेज हो गई है। NCP सांसद लांके ने कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।