E20 पेट्रोल नीति पर बोले प्रो. अनिरुद्ध पंडित, कहा 20% एथेनॉल मिश्रण से इंजन पर बड़ा खतरा नहीं
Maharashtra महाराष्ट्र। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाली E20 नीति को लेकर उठ रहे सवालों पर इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर प्रो. अनिरुद्ध बी. पंडित ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाना कोई नई या असंभव बात नहीं है।
प्रो. अनिरुद्ध पंडित ने कहा कि भारत में 1940 और 1950 के दशक में भी कुछ वाहन 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलते थे। ऐसे में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि E20 नीति को लेकर लोगों के मन में मुख्य सवाल ईंधन की क्षमता और इंजन के प्रदर्शन को लेकर हैं।
उन्होंने बताया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन की माइलेज या ईंधन अर्थव्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है। यही एक प्रमुख मुद्दा है जिसे लोग उठा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से एथेनॉल मिश्रण को अपनाया जा सकता है।
E20 नीति का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। एथेनॉल उत्पादन में कृषि क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
प्रो. पंडित ने कहा कि इस नीति के आर्थिक प्रभावों को भी ध्यान में रखना होगा। एथेनॉल मिश्रण से आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। E20 पेट्रोल नीति को लेकर देश में लगातार चर्चा जारी है। जहां सरकार इसे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद बता रही है, वहीं कुछ लोग वाहनों की माइलेज और लंबे समय में इंजन पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।