महाराष्ट्र में CCMP पास होम्योपैथी डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन का रास्ता साफ, सरकार ने दिए निर्देश
मुंबई। महाराष्ट्र में होम्योपैथी की पढ़ाई करने वाले और मॉडर्न फार्माकोलॉजी में एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स पूरा कर चुके चिकित्सकों के पंजीकरण को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अगस्त के पहले सप्ताह में महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) को निर्देश दिया कि वह मॉडर्न फार्माकोलॉजी में सर्टिफिकेट कोर्स (CCMP) पूरा करने वाले पात्र होम्योपैथी स्नातकों का सशर्त पंजीकरण शुरू करे। इस फैसले के बाद CCMP प्रशिक्षित पात्र चिकित्सकों के लिए निर्धारित शर्तों के तहत महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का रास्ता खुल गया है।
CCMP यानी Certificate Course in Modern Pharmacology को महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (MUHS) द्वारा शुरू किया गया था। यह एक वर्षीय पाठ्यक्रम बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) की डिग्री रखने वाले चिकित्सकों के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत उन्हें मॉडर्न फार्माकोलॉजी के साथ चुनिंदा आधुनिक दवाओं के इस्तेमाल से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है।
सरकार के ताजा निर्देश का उद्देश्य ऐसे पात्र चिकित्सकों के पंजीकरण से संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है, जिन्होंने निर्धारित CCMP पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है। हालांकि यह पंजीकरण सशर्त होगा और संबंधित चिकित्सकों को सरकार तथा मेडिकल काउंसिल की ओर से निर्धारित नियमों और दायरे का पालन करना होगा।
CCMP पाठ्यक्रम लंबे समय से महाराष्ट्र के चिकित्सा क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा है। इसका उद्देश्य BHMS स्नातकों को मॉडर्न फार्माकोलॉजी से संबंधित अतिरिक्त प्रशिक्षण देना है। इस कोर्स में आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल होने वाली चुनिंदा दवाओं, उनके प्रभाव और उपयोग से संबंधित जानकारी दी जाती है।
महाराष्ट्र में विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। ऐसे क्षेत्रों में होम्योपैथी सहित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। CCMP जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम को इसी व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था के संदर्भ में भी देखा जाता रहा है।
सरकार की ओर से महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल को दिए गए निर्देश के बाद अब पंजीकरण प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। पात्रता, प्रमाणपत्रों की जांच और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही संबंधित चिकित्सकों का पंजीकरण किया जा सकेगा। सशर्त पंजीकरण होने के कारण उनकी प्रैक्टिस का दायरा भी लागू नियमों के अधीन रहेगा।
इस फैसले का असर बड़ी संख्या में उन BHMS स्नातकों पर पड़ सकता है, जिन्होंने एक वर्षीय CCMP पाठ्यक्रम पूरा किया है और अपने पंजीकरण को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे थे। सरकार के निर्देश से ऐसे चिकित्सकों को औपचारिक व्यवस्था के तहत आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
हालांकि होम्योपैथी स्नातकों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति से संबंधित अधिकार दिए जाने का मुद्दा चिकित्सा जगत में लंबे समय से बहस का विषय रहा है। आधुनिक चिकित्सा से जुड़े चिकित्सक संगठन और अन्य हितधारक समय-समय पर इस तरह की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका प्रमुख तर्क चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण की अवधि, मरीजों की सुरक्षा और अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के बीच निर्धारित सीमाओं से जुड़ा रहा है।
दूसरी ओर CCMP प्रशिक्षित चिकित्सकों और उनसे जुड़े संगठनों का तर्क रहा है कि उन्होंने महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा निर्धारित अतिरिक्त प्रशिक्षण पूरा किया है। ऐसे में उन्हें नियमों के अनुसार पंजीकरण और प्रशिक्षण के दायरे में काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
इसी वजह से सरकार की ओर से सशर्त पंजीकरण का रास्ता अपनाया गया है। इससे एक ओर प्रशिक्षित BHMS चिकित्सकों के पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी, वहीं दूसरी ओर उनके अधिकार और कार्यक्षेत्र को निर्धारित नियमों से जोड़ा जा सकेगा।
महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल राज्य में आधुनिक चिकित्सा से जुड़े चिकित्सकों के पंजीकरण और पेशेवर मानकों से संबंधित महत्वपूर्ण संस्था है। CCMP प्रशिक्षित चिकित्सकों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद काउंसिल की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। उसे आवेदकों की पात्रता और दस्तावेजों की जांच के साथ सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यह भी महत्वपूर्ण है कि CCMP पूरा करने का अर्थ बिना किसी सीमा के आधुनिक चिकित्सा के सभी क्षेत्रों में काम करने की स्वतः अनुमति नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित चिकित्सकों के अधिकार उनके प्रशिक्षण, लागू सरकारी आदेश और नियामक शर्तों के आधार पर निर्धारित होंगे। इसलिए पंजीकरण और प्रैक्टिस के वास्तविक दायरे के लिए आधिकारिक नियमों का पालन आवश्यक होगा।
महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़े शहरों में अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी रहती है। सरकार विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कदम उठाती रही है।
CCMP कार्यक्रम को भी प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिशों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इसके साथ मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इस कारण प्रशिक्षण और पंजीकरण की शर्तों का स्पष्ट होना जरूरी माना जाता है।
महाराष्ट्र सरकार के नए निर्देश के बाद अब निगाह महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल की पंजीकरण प्रक्रिया पर रहेगी। यह देखा जाएगा कि आवेदन किस प्रकार स्वीकार किए जाते हैं, पात्रता के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मांगे जाते हैं और सशर्त पंजीकरण के तहत चिकित्सकों के लिए क्या सीमाएं निर्धारित की जाती हैं।
फिलहाल सरकार के निर्देश से CCMP पूरा करने वाले पात्र BHMS स्नातकों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक रास्ता खुला है। आने वाले दिनों में पंजीकरण प्रक्रिया और उससे संबंधित विस्तृत नियम सामने आने के बाद यह अधिक स्पष्ट होगा कि CCMP प्रशिक्षित चिकित्सक किस सीमा तक आधुनिक फार्माकोलॉजी और चुनिंदा आधुनिक दवाओं से संबंधित चिकित्सा सेवाएं दे सकेंगे।