Mumbai Court : झूठे बयान के आरोप पर अलग सुनवाई का निर्देश

Update: 2026-05-02 04:58 GMT

Maharashtra महाराष्ट्र: हाउसिंग सोसाइटी में कथित तौर पर बिना अनुमति बनाए गए गैराज को लेकर चल रहे विवाद में मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रतिवादी पर झूठे बयान देने के आरोप से जुड़ी याचिका पर अलग से न्यायिक जांच के तौर पर सुनवाई की जाएगी।

यह आदेश जज शिल्पा तोडकर ने 29 अप्रैल को दिया। मामला M/s Celine Maria Fernandes द्वारा दायर सिविल मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें प्रतिवादी नंबर 2 Homyar H. Limbuwala शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि झूठे बयान देने के आरोप से संबंधित आवेदन को मुख्य सिविल मुकदमे के साथ नहीं सुना जा सकता, बल्कि इसे एक अलग विविध याचिका (miscellaneous application) के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए।

यह मूल मामला वर्ष 2020 में दायर किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि कल्याण के कोले क्षेत्र स्थित होशंग बाग हाउसिंग सोसाइटी में एक बंद गैराज को सोसाइटी की साझा खुली जगह पर अवैध रूप से बनाया गया था। इस निर्माण को लेकर सोसाइटी में लंबे समय से विवाद चल रहा है।

सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी Homyar H. Limbuwala ने शपथ लेकर अदालत में झूठे बयान दिए और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की। याचिका में यह भी मांग की गई कि उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार के गंभीर आरोपों की जांच अलग से की जानी चाहिए, ताकि मुख्य मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित न हो। इसलिए झूठे बयान से संबंधित आवेदन को एक स्वतंत्र प्रक्रिया के रूप में सुना जाएगा।

जज शिल्पा तोडकर ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य सिविल विवाद और झूठे बयान के आरोप दोनों अलग-अलग कानूनी पहलू हैं, जिनकी सुनवाई अलग स्तर पर की जाएगी।

इस आदेश के बाद अब यह मामला दो अलग-अलग प्रक्रियाओं में आगे बढ़ेगा—एक ओर हाउसिंग सोसाइटी में कथित अवैध निर्माण का विवाद और दूसरी ओर अदालत को गुमराह करने के आरोपों की जांच।

स्थानीय स्तर पर यह मामला हाउसिंग सोसाइटी में निर्माण और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर चर्चा में बना हुआ है। अब सभी की नजर आगे की न्यायिक कार्यवाही पर टिकी हुई है।

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