मोशी हादसा: फायर ऑफिसर को नोटिस, NOC पर उठे सवाल

Update: 2026-07-26 07:34 GMT

पिंपरी-चिंचवड़ : मोशी कचरा डिपो में हुए हादसे के बाद पिंपरी-चिंचवड़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (PCMC) ने कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर निगम ने फायर ऑफिसर ऋषिकान्त चिपड़े को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने बिना बिल्डिंग प्लान की उचित जांच और बिना मौके का निरीक्षण किए ही एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग के लिए फाइनल फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया था।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह नोटिस 17 जुलाई को जारी किया गया था। PCMC कमिश्नर डॉ. विजय सूर्यवंशी ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि शुरुआती जांच में फायर क्लीयरेंस देने की प्रक्रिया में लापरवाही के संकेत मिले हैं। जिस इमारत को लेकर सवाल उठे हैं, वही इमारत बाद में मोशी हादसे के दौरान ढह गई थी।

नोटिस में फायर ऑफिसर से इस मामले में जवाब मांगा गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए फायर NOC जारी की गई। नगर निगम प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, मोशी कचरा डिपो में बनी एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग के लिए मई 2019 में प्रारंभिक रूप से प्रोविज़नल फायर NOC जारी की गई थी। इसके बाद बिल्डिंग परमिशन डिपार्टमेंट ने 26 जुलाई 2023 को एक संशोधित प्लान को मंजूरी दी थी।

नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, बिल्डिंग परमिशन विभाग ने जिस संशोधित प्लान को मंजूरी दी, वह केवल ग्राउंड फ्लोर स्ट्रक्चर के लिए था। इस प्लान में बिल्ट-अप एरिया 500.59 वर्ग मीटर बताया गया था। हालांकि, आरोप है कि इसके बाद फायर डिपार्टमेंट ने उसी दिन इससे अलग तीन मंजिला (G+2) इमारत के लिए फाइनल फायर NOC जारी कर दी।

नोटिस के अनुसार, फायर NOC जिस इमारत के लिए जारी की गई, उसका बिल्ट-अप एरिया 1,056.60 वर्ग मीटर था। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब बिल्डिंग परमिशन विभाग ने केवल ग्राउंड फ्लोर के लिए मंजूरी दी थी, तो फायर विभाग ने तीन मंजिला इमारत के लिए क्लीयरेंस किस आधार पर जारी किया।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि फायर NOC जारी करने से पहले संबंधित अधिकारी को स्वीकृत नक्शे की जांच करनी होती है और आवश्यक होने पर साइट निरीक्षण भी करना होता है। लेकिन इस मामले में नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।

मोशी हादसे के बाद नगर निगम प्रशासन पर भी सवाल उठे हैं। हादसे में इमारत के ढहने के कारणों की जांच की जा रही है और विभिन्न विभागों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि निर्माण, अनुमति और सुरक्षा मानकों से जुड़ी प्रक्रियाओं में कहां चूक हुई।

PCMC अधिकारियों ने बताया कि फायर विभाग से जुड़े दस्तावेजों और अनुमतियों की जांच की जा रही है। इसके अलावा अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सरकारी या सार्वजनिक उपयोग वाली इमारत के लिए फायर NOC बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। यह प्रमाणित करता है कि इमारत में आग से सुरक्षा संबंधी आवश्यक इंतजाम मौजूद हैं। ऐसे में बिना जांच के फायर क्लीयरेंस देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जा सकता है।

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी विभागों को भवन अनुमतियों और सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी करते समय नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल फायर ऑफिसर ऋषिकान्त चिपड़े को जारी नोटिस का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मोशी हादसे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और अधिकारियों पर भी कार्रवाई होने की संभावना है।

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