Malegaon मालेगांव: मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने मंगलवार को मालेगांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय बार-बार पीड़ा सहने या सड़कों पर उतरने के लिए तैयार नहीं है, इसलिए सरकार को जल्द और प्रभावी निर्णय लेना चाहिए। जरांगे पाटिल ने कहा, “हम अपनी ताकत का इस्तेमाल मजबूती से खड़े रहने के लिए करेंगे। जब भी कोई घटना होती है, नेता परिवार के आसपास इकट्ठा होते हैं, दो-चार सहानुभूति के शब्द बोलते हैं और फिर घर जाकर सो जाते हैं। इससे न तो कानून बदलता है और न ही राज्य में किसी को न्याय मिलता है।
उन्होंने नेताओं पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि मराठा समाज अब केवल खोखली संवेदनाओं से संतुष्ट नहीं होगा। उनके अनुसार, कई बार गंभीर घटनाओं और अन्याय का सामना करने के बावजूद समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई है। पाटिल ने आगे कहा, “हम अपने राज्य में बार-बार पीड़ित नहीं बनना चाहते। हमें दोबारा सड़कों पर उतरने की नौबत न आए। हमें कानून तोड़ने पर मजबूर न किया जाए। हमारी सिर्फ एक ही मांग है—सही, स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रूप से जारी रहेगा, लेकिन अगर सरकार ने अनदेखी जारी रखी, तो मराठा समाज के आक्रोश को रोक पाना मुश्किल होगा। पाटिल ने चेतावनी दी कि समुदाय की भावनाओं को समझकर ही सरकार को कदम उठाना चाहिए, क्योंकि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब धैर्य खत्म हो रहा है। मालेगांव की सभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और भीड़ ने पाटिल के हर वक्तव्य पर समर्थन जताया। मराठा आरक्षण को लेकर पिछले कई महीनों से महाराष्ट्र की राजनीति गर्म है और आंदोलन राज्य सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। जरांगे पाटिल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब समुदाय समाधान न मिलने पर राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी में है। फिलहाल सरकार ने वार्ता के संकेत दिए हैं, लेकिन पाटिल का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय चाहिए।