मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के लालबाग इलाके में गणेश उत्सव के दौरान बिजली से जुड़े एक हादसे में आठ साल की बच्ची समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। घटना रविवार तड़के कालाचौकी इलाके के दत्ताराम लाड मार्ग पर गणेश मंडप के पास हुई। हादसे के समय गणेश उत्सव के कारण इलाके में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

अधिकारियों के अनुसार हादसा रविवार तड़के करीब 2:20 बजे कालाचौकी डिवीजन पब्लिक फेस्टिवल बोर्ड के गणेश मंडप के पास हुआ। घटना की जानकारी मुंबई फायर ब्रिगेड को करीब 2:42 बजे मिली। सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट यानी BEST के कर्मचारी और संबंधित वार्ड कार्यालय के कर्मचारी मौके पर पहुंचे।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसा बिजली के संपर्क में आने के कारण हुआ। गणेश उत्सव की वजह से लालबाग और आसपास के इलाकों में देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान मंडप के पास बिजली से जुड़ी घटना हुई और कई लोग इसकी चपेट में आ गए। अचानक हुए हादसे के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

घटना में छह लोग प्रभावित हुए। इनमें आठ साल की बच्ची भी शामिल थी। हादसे के तुरंत बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। डॉक्टरों ने बच्ची समेत दो लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि चार अन्य घायलों का इलाज कराया गया। घटना के बाद प्रशासन ने मौके की सुरक्षा व्यवस्था संभाली और बिजली से जुड़े संभावित खतरे को दूर करने की कार्रवाई शुरू की।

हादसे की सूचना मिलने के बाद BEST के कर्मचारियों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर बिजली व्यवस्था की जांच की। मंडप और उसके आसपास लगे बिजली के तार, कनेक्शन और अन्य उपकरणों की पड़ताल की गई। हादसा किस वजह से हुआ और बिजली का प्रवाह किस तरह लोगों तक पहुंचा, इसे लेकर विस्तृत जांच की जा रही है।

लालबाग मुंबई में गणेश उत्सव के सबसे प्रमुख केंद्रों में से एक है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां दिन-रात बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई सार्वजनिक गणेश मंडलों की ओर से भव्य पंडाल और सजावट की जाती है। इस दौरान रोशनी और सजावट के लिए बड़े पैमाने पर बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में विद्युत सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

घटना के समय भी इलाके में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हादसा होते ही आसपास मौजूद लोगों ने प्रभावित लोगों की मदद करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और अन्य आपातकालीन एजेंसियों को सूचना दी गई। दमकल विभाग को सूचना मिलने के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

हादसे में आठ साल की बच्ची की मौत से इलाके में शोक का माहौल है। गणेश उत्सव के बीच हुई इस घटना ने उत्सव की खुशियों को मातम में बदल दिया। वहीं दूसरे मृतक की मौत के बाद उनके परिवार में भी मातम पसरा हुआ है। चार अन्य घायलों की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नजर रख रही है।

अधिकारियों की प्राथमिकता हादसे के वास्तविक कारण का पता लगाना है। जांच में यह देखा जा रहा है कि बिजली का करंट किसी खुले तार, खराब कनेक्शन, उपकरण या किसी अन्य तकनीकी खराबी के कारण फैला था या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जा सकता है कि मंडप में बिजली व्यवस्था के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

गणेश उत्सव जैसे बड़े आयोजनों में अस्थायी बिजली कनेक्शन, सजावटी लाइटें और अन्य विद्युत उपकरण बड़ी संख्या में लगाए जाते हैं। बारिश या नमी के दौरान इन उपकरणों में खराबी होने पर खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और आयोजकों के लिए नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।

मुंबई पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र की जांच शुरू कर दी है। प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। इसके अलावा इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की मदद से हादसे से ठीक पहले की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया जाएगा। तकनीकी जांच के बाद ही दुर्घटना के सटीक कारण की पुष्टि हो सकेगी।

BEST की टीम भी बिजली आपूर्ति और कनेक्शन से संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि घटनास्थल पर किसी तरह का अतिरिक्त विद्युत खतरा न रहे, ताकि वहां मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

गणेश उत्सव के दौरान मुंबई के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में सार्वजनिक मंडप लगाए जाते हैं। इन स्थानों पर हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। लालबाग की घटना के बाद ऐसे मंडपों में बिजली सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत सामने आई है।

फिलहाल इस हादसे में दो लोगों की जान चली गई है और चार अन्य घायल हुए हैं। प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी या यह अचानक हुई तकनीकी खराबी का नतीजा था।

 

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