महाराष्ट्र कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक्स, IT और AI के लिए एक नए स्वतंत्र विभाग को दी मंज़ूरी
Mumbai: महाराष्ट्र कैबिनेट ने राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक नए स्वतंत्र विभाग की स्थापना को मंज़ूरी दे दी है। यह 'विकसित भारत 2047' विज़न के तहत 'विकसित महाराष्ट्र' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय को इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कमिश्नरेट में बदल दिया जाएगा। मंत्रालयी विभागों, कमिश्नर कार्यालय और सभी ज़िलों के लिए स्थायी पदों वाला एक नया सूचना प्रौद्योगिकी कैडर (IT कैडर) बनाया जाएगा। इस कदम से राज्य में IT, AI और डिजिटल गवर्नेंस को गति मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (MRSAC) को अब एक कंपनी में बदल दिया जाएगा। सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत इसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा, और इसे कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत एक कंपनी के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस फ़ैसले से सड़क सूचना प्रणाली, शहरी नियोजन, जलयुक्त शिवार-वाटरशेड विकास, पहाड़ी विकास योजना, ई-पंचनामा, महा एग्री टेक, मैंग्रोव अध्ययन, भूजल प्रबंधन, और खनिज व खनन अध्ययन जैसी परियोजनाओं में तेज़ी आएगी।
जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से शासन को बेहतर बनाने के लिए एक महाराष्ट्र जियोटेक्नोलॉजी एप्लीकेशन सेंटर (MahaGeotech) कंपनी भी स्थापित की जाएगी। आधुनिक टेक्नोलॉजी, अनुसंधान, जियोस्पेशियल नवाचार और उद्यमिता पहलों के साथ, छात्रों, पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए शैक्षिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी (MSEDCL / महावितरण) का वित्तीय पुनर्गठन किया जाएगा। सरकारी बॉन्ड के ज़रिए पूंजी बाज़ार से 32,679 करोड़ रुपये के सरकारी गारंटी वाले ऋण जुटाए जाएंगे। इसके अलावा, कृषि वितरण व्यवसाय को अलग किया जाएगा (Agri Demerger), और महावितरण को भी पूंजी बाज़ार में सूचीबद्ध किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र रिस्पॉन्सिव डेवलपमेंट प्रोग्राम (MRDP) को लागू करने की मंज़ूरी दे दी गई है। निजी पूंजी के सहयोग से आपदा प्रबंधन के लिए धन जुटाया जाएगा, जिसमें विश्व बैंक से मिलने वाले 165 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। आपदाओं से प्रभावित नागरिकों को गृह ऋण पर रियायतें मिलेंगी, जबकि MSME को ऋण राहत और बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। कोल्हापुर, सांगली और इचलकरंजी में बाढ़ के पानी की निकासी में सुधार करने तथा कृष्णा नदी बेसिन में बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए भी योजनाएँ तैयार की जाएँगी।