मुंबई। कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों ने आखिरकार राहत की सांस ली है। कई दिनों तक अनिश्चितता, भूस्खलन और संचार व्यवस्था ठप होने जैसी मुश्किलों का सामना करने के बाद तीर्थयात्री शनिवार को सुरक्षित महाराष्ट्र लौट आए।
नेपाल में खराब मौसम और प्राकृतिक घटनाओं के कारण कई यात्री रास्ते में फंस गए थे। इनमें महाराष्ट्र के भी कई श्रद्धालु शामिल थे। प्रशासन की लगातार कोशिशों के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया और काठमांडू के रास्ते भारत वापस लाया गया।
कठिन हालातों के बीच पूरी की वापसी यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे तीर्थयात्रियों को नेपाल के कई इलाकों में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं, जिससे रास्ते बाधित हो गए।
इसके अलावा कई क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और संचार सेवाएं भी प्रभावित हो गई थीं। इस वजह से यात्रियों का अपने परिवारों से संपर्क टूट गया था और परिजनों की चिंता बढ़ गई थी।
यात्रियों ने बताया कि वापसी का रास्ता बेहद कठिन था। कई समूहों ने जोखिम भरे और घुमावदार पहाड़ी रास्तों से सफर पूरा किया।
पुणे की स्मिता पवार ने सुनाई आपबीती
पुणे निवासी स्मिता प्रदीप पवार उन चार महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों में शामिल थीं, जो यात्रा से लौटते समय नेपाल के केरुंग (ग्यिरोंग) इलाके में फंस गए थे।
स्मिता पवार ने बताया कि उस समय हालात बेहद डरावने थे। संचार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी थी, जिसके कारण परिवार से संपर्क करना मुश्किल हो गया था।
उन्होंने बताया कि लगातार बदलते मौसम, रास्तों की खराब स्थिति और अनिश्चित माहौल के बीच सभी यात्रियों के मन में डर बना हुआ था। हालांकि प्रशासन की मदद और स्थानीय सहयोग से आखिरकार सभी सुरक्षित निकल सके।
महाराष्ट्र सरकार ने की मदद
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय और आपदा प्रबंधन विभाग ने नेपाल में फंसे यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किए।
प्रशासन ने नेपाल में संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर यात्रियों की जानकारी जुटाई और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए व्यवस्था की।
महाराष्ट्र सरकार की कोशिशों के बाद चारों यात्री समेत कई अन्य लोग शनिवार को काठमांडू से महाराष्ट्र पहुंचे।
परिवारों ने ली राहत की सांस
कई दिनों तक संपर्क नहीं होने के कारण यात्रियों के परिवार चिंतित थे। जैसे ही उनके सुरक्षित लौटने की खबर मिली, परिवारों ने राहत की सांस ली।
परिजनों ने सरकार और प्रशासन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में प्रशासन की सक्रियता के कारण उनके अपने लोग सुरक्षित घर वापस आ सके।
यात्रियों ने बताया प्राकृतिक आपदा जैसा अनुभव
वापस लौटे यात्रियों ने बताया कि नेपाल में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। कई स्थानों पर रास्ते बंद थे और पहाड़ी इलाकों में सफर करना खतरे से खाली नहीं था।
उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा लगा कि आगे बढ़ना मुश्किल होगा, लेकिन सभी यात्रियों ने हिम्मत बनाए रखी।
यात्रियों ने प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग की भी सराहना की, जिन्होंने संकट के समय उनकी मदद की।
आपदा प्रबंधन की भूमिका अहम
इस पूरे घटनाक्रम में आपदा प्रबंधन विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण रही। विदेश में फंसे यात्रियों की जानकारी जुटाना, संपर्क स्थापित करना और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती थी।
अधिकारियों ने लगातार स्थिति पर नजर रखी और यात्रियों को निकालने के लिए जरूरी कदम उठाए।
सुरक्षित वापसी से खत्म हुई चिंता
नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी के साथ ही उनके परिवारों की चिंता भी खत्म हो गई है। हालांकि यात्रियों ने जिस तरह की परिस्थितियों का सामना किया, वह उनके लिए जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन गया।
प्राकृतिक आपदाओं और खराब मौसम के बीच भी यात्रियों ने धैर्य बनाए रखा और प्रशासन के सहयोग से सुरक्षित अपने घर पहुंच गए।