नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने रविवार को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाले गए संयुक्त विरोध मार्च का समर्थन किया। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने इस मार्च का नेतृत्व किया। विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित रहा।
डी. राजा ने इस रैली को “हौसला बढ़ाने वाली और प्रेरणादायक” बताते हुए कहा कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से एक मजबूत संदेश जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर नाराजगी केवल दिल्ली या मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग स्थानों पर लोग अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं।
राजा ने कहा कि मुंबई में हुआ विरोध प्रदर्शन विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के एक मंच पर आने का उदाहरण है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से विरोध प्रदर्शनों और उठाई जा रही मांगों पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। यह CPI नेता की राजनीतिक मांग है; मुख्य चुनाव आयुक्त के पद या चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अंतिम कानूनी या संवैधानिक निष्कर्ष इससे स्थापित नहीं होता।
मुंबई में रविवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से विरोध मार्च का नेतृत्व किया। मार्च में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के नेताओं और समर्थकों की भागीदारी भी दर्ज की गई। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के SIR को लेकर अपनी मांगें उठा रहे थे।
डी. राजा ने कहा कि विरोध प्रदर्शन को केवल एक राजनीतिक दल की गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक ताकतों की भागीदारी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर बढ़ती चिंता को दिखाती है। हालांकि यह उनका राजनीतिक आकलन है और विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या या राजनीतिक समर्थन को चुनावी जनमत का प्रत्यक्ष पैमाना नहीं माना जा सकता।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की ओर से निकाले गए संयुक्त मार्च में SIR एक प्रमुख मुद्दा रहा। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग का कहना रहा है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र या अमान्य प्रविष्टियों को हटाकर सूची को सही रखना है।
राज ठाकरे ने प्रदर्शन के दौरान SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग भी उठाई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखी और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल किए। दूसरी ओर उद्धव ठाकरे ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक सवाल उठाए। ये आरोप और दावे संबंधित नेताओं के हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
डी. राजा ने अपने बयान में कहा कि मुंबई में हुआ प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूह एक साथ आकर अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को इन आवाजों को गंभीरता से लेना चाहिए।
CPI महासचिव के मुताबिक, चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर लोगों का विश्वास बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसी आधार पर ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने की मांग का समर्थन किया। राजा ने इसे राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि लोगों की चिंताओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
मुंबई का संयुक्त मार्च इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक साथ इसका नेतृत्व किया। दोनों नेताओं ने इससे पहले 4 अक्टूबर को चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की थी और अन्य विपक्षी दलों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया था।
मार्च दक्षिण मुंबई में मेट्रो सिनेमा के पास से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय की ओर बढ़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़ी अपनी मांगों को सामने रखा।
राजा का कहना था कि ऐसे प्रदर्शन केवल राजनीतिक नेताओं तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि आम लोग भी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को सुनना और संस्थाओं के प्रति उठ रहे सवालों का जवाब देना आवश्यक है।
हालांकि चुनाव आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगाए जा रहे उन आरोपों से इनकार किया है जिनमें कहा गया है कि पुनरीक्षण से किसी विशेष राजनीतिक पक्ष को लाभ पहुंचाया जा रहा है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया को आवश्यक बताया है।
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर हाल के दिनों में दिल्ली और मुंबई में अलग-अलग विरोध प्रदर्शन सामने आए हैं। रविवार को भी दोनों शहरों में प्रदर्शन हुए। मुंबई में ठाकरे बंधुओं ने मार्च का नेतृत्व किया, जबकि दिल्ली में भी प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगें रखीं।
डी. राजा के बयान के बाद विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उठ रही राजनीतिक मांगों को CPI का भी समर्थन मिल गया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ज्ञानेश कुमार को विरोध प्रदर्शनों और लोगों की मांगों को समझते हुए पद छोड़ देना चाहिए।
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग राजनीतिक विवाद का विषय बनी हुई है। एक ओर विपक्षी नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव जारी है और विभिन्न दल अपने-अपने पक्ष सामने रख रहे हैं।