पुणे: पुणे ग्रामीण क्षेत्र के शिरूर में कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर सुपारी लेकर हत्या करने पहुंचे हमलावरों ने गलत व्यक्ति को अपना निशाना समझ लिया। इस घटना में 39 वर्षीय वॉटर प्लांट कर्मचारी हमजा उस्मान शेख की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि हमलावरों का असली टारगेट कोई और व्यक्ति था, लेकिन पहचान में हुई गलती के कारण हमजा की जान चली गई।

पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, घटना 29 सितंबर की सुबह करीब 6:30 बजे हुई। हमजा उस्मान शेख साई नगर, करेगांव स्थित एक वॉटर प्लांट में मौजूद थे। यह इलाका रंजनगांव पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है।

इसी दौरान हथियारबंद हमलावर वहां पहुंचे और उन्होंने हमजा को अपना टारगेट समझ लिया। आरोप है कि हमलावरों ने उसके सिर में गोली मार दी। गोली लगने से उसकी मौके पर ही गंभीर स्थिति हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई।

शुरुआत में मामला सामान्य हत्या जैसा दिखाई दे रहा था, लेकिन पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो एक अलग ही कहानी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, हमजा वास्तव में हमलावरों का निशाना नहीं था।

जांच में पता चला कि कथित कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का असली टारगेट विकास माधवराव नवले नाम का व्यक्ति था। पुलिस के अनुसार, नवले का जमीन और पैसों के लेन-देन को लेकर मामले के एक संदिग्ध से विवाद चल रहा था।

इसी विवाद को हत्या की कथित साजिश के पीछे की वजह माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि नवले को रास्ते से हटाने के लिए कथित तौर पर सुपारी दी गई थी।

लेकिन जब शूटर मौके पर पहुंचे तो उन्होंने पहचान में गलती कर दी। उन्होंने वॉटर प्लांट में काम कर रहे हमजा उस्मान शेख को विकास नवले समझ लिया और उस पर गोली चला दी।

इस चूक ने पूरे मामले को और सनसनीखेज बना दिया। एक ऐसे व्यक्ति की जान चली गई, जिसका कथित विवाद से कोई सीधा संबंध नहीं था।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अब तक कुल सात संदिग्धों की पहचान की है। इनमें से पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो कथित शूटर अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।

पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। उनके संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच में सबसे महत्वपूर्ण खुलासा कथित कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की चेन को लेकर हुआ है। पुलिस का दावा है कि हत्या की सुपारी सीधे शूटरों तक नहीं पहुंची थी।

बल्कि कथित तौर पर कॉन्ट्रैक्ट एक संदिग्ध से दूसरे संदिग्ध तक पहुंचाया गया और इसके बाद शूटरों को विकास नवले की हत्या के लिए भेजा गया।

इससे पुलिस को शक है कि हत्या की साजिश में केवल शूटर ही नहीं बल्कि कई स्तर पर लोग शामिल थे। हर व्यक्ति की भूमिका अलग-अलग रही हो सकती है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित सुपारी की रकम कितनी थी, किस व्यक्ति ने सबसे पहले हत्या की योजना बनाई और शूटरों तक निर्देश किस माध्यम से पहुंचे।

इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने विकास नवले की पहचान और गतिविधियों के बारे में जानकारी किससे हासिल की थी।

पुलिस के सामने एक बड़ा सवाल यह भी है कि हमलावरों ने हमजा को नवले क्यों समझ लिया। क्या दोनों के हुलिये में समानता थी या शूटरों को केवल अधूरी जानकारी दी गई थी, इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि घटना से पहले आरोपियों ने इलाके की रेकी की थी या नहीं। यदि रेकी की गई थी तो उसमें कौन-कौन शामिल था।

कथित तौर पर जिस जमीन और पैसों के विवाद को हत्या की साजिश का कारण बताया जा रहा है, उससे जुड़े दस्तावेजों और लेन-देन की जानकारी भी खंगाली जा रही है।

पुलिस यह भी देख रही है कि विवाद कितना पुराना था और क्या दोनों पक्षों के बीच पहले भी धमकी या झगड़े की घटनाएं हुई थीं।

हमजा उस्मान शेख की हत्या ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वह वॉटर प्लांट में काम करता था और रोज की तरह अपनी ड्यूटी पर पहुंचा था, लेकिन कथित हमलावरों की पहचान की गलती का शिकार हो गया।

मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस उनसे फरार शूटरों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

दोनों शूटरों की गिरफ्तारी को मामले की जांच के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनसे यह स्पष्ट हो सकता है कि उन्हें टारगेट की पहचान कैसे बताई गई थी।

इसके अलावा, फरार आरोपियों से कॉन्ट्रैक्ट की रकम और पूरी साजिश में शामिल दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।

पुलिस का फोकस अब कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की पूरी चेन को उजागर करने पर है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि साजिश की शुरुआत किस स्तर से हुई और किस-किस व्यक्ति ने इसमें भूमिका निभाई।

फिलहाल पांच संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है और दो कथित शूटरों की तलाश जारी है। पुलिस मामले से जुड़े तकनीकी और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

शिरूर की यह वारदात इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि कथित तौर पर किसी और की हत्या के लिए बनाई गई योजना में एक निर्दोष वॉटर प्लांट कर्मचारी की जान चली गई।

अब पुलिस की जांच से यह साफ होगा कि इस कथित सुपारी हत्या की योजना में और कितने लोग शामिल थे और असली टारगेट विकास माधवराव नवले की हत्या की साजिश किसने और किस उद्देश्य से रची थी।

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