नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का दिल्ली और मेरठ के बीच 40 लेन की सड़क बनाने का दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। गडकरी ने एक कार्यक्रम के दौरान देश में तेजी से विकसित हो रहे सड़क नेटवर्क का उदाहरण देते हुए दिल्ली मेरठ मार्ग की चौड़ाई और क्षमता का जिक्र किया।

गडकरी ने कहा कि दिल्ली से मेरठ के बीच बनाई गई सड़क आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस दावे को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने इसे देश में हो रहे बड़े सड़क विकास कार्यों से जोड़कर देखा, जबकि कुछ यूजर्स ने 40 लेन के दावे को लेकर सवाल भी उठाए।

दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल है। यह दिल्ली को गाजियाबाद होते हुए मेरठ से जोड़ता है और इसका उद्देश्य यात्रा के समय को कम करना तथा ट्रैफिक दबाव घटाना है। इस परियोजना में अलग अलग हिस्सों को कई लेन में विकसित किया गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही आसान हुई है।

दरअसल, सड़क निर्माण की क्षमता केवल मुख्य सड़क की लेन संख्या से तय नहीं होती, बल्कि इसमें सर्विस रोड, हाईवे लेन, इंटरचेंज, फ्लाईओवर और अन्य कनेक्टिंग मार्गों को भी शामिल किया जाता है। इसी वजह से गडकरी के 40 लेन वाले बयान को लेकर अलग अलग तरह की व्याख्या सामने आ रही है।

दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे बनने के बाद दिल्ली से मेरठ की दूरी तय करने में लगने वाला समय काफी कम हुआ है। इस मार्ग पर आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इससे दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में आवागमन को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से देश में हाईवे और एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाते रहे हैं। उनका कहना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होती है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि वास्तव में दिल्ली मेरठ मार्ग की कुल क्षमता कितनी है और 40 लेन का आंकड़ा किस आधार पर बताया गया। फिलहाल यह बयान सड़क परियोजनाओं की बढ़ती क्षमता और देश में हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।

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