मुंबई। दिवाली के त्योहार से पहले महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग और मिलावट की आशंकाओं को देखते हुए राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने विशेष जांच अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में 105 खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। कार्रवाई की जद में बिरयानी बाय किलो, ब्लिंकिट, जेप्टो और डी-मार्ट जैसे बड़े नाम भी आए हैं। इसके अलावा 69 से अधिक प्रतिष्ठानों से 1.35 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का संदिग्ध, असुरक्षित और कथित मिलावटी खाद्य स्टॉक जब्त किया गया है। इस कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में हलचल बढ़ गई है।
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में यह विशेष अभियान चलाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को असुरक्षित खाद्य सामग्री से बचाना है। दिवाली के मौके पर मिठाइयों, नमकीन, डेयरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर निगरानी विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
एफडीए के इस अभियान में छोटे दुकानदारों के साथ-साथ बड़े खाद्य कारोबारियों और ऑनलाइन डिलीवरी से जुड़ी कंपनियों के प्रतिष्ठान भी जांच के दायरे में आए। बिरयानी बाय किलो, ब्लिंकिट, जेप्टो और डी-मार्ट जैसे नामों का कार्रवाई में सामने आना यह दर्शाता है कि विभाग ने जांच का दायरा केवल स्थानीय दुकानों तक सीमित नहीं रखा। हालांकि, प्रत्येक कंपनी या प्रतिष्ठान के खिलाफ किस विशेष नियम के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई की गई, इसकी विस्तृत जानकारी अलग-अलग जांच रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने विशेष जांच अभियान के दौरान खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की जांच की। अभियान में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर 105 खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित किए गए। खाद्य व्यवसाय संचालित करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई संबंधित प्रतिष्ठानों के संचालन पर प्रभाव डाल सकती है।
इस अभियान की एक बड़ी कार्रवाई 1.35 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के खाद्य स्टॉक की जब्ती रही। विभाग ने 69 से अधिक प्रतिष्ठानों से संदिग्ध, असुरक्षित और कथित मिलावटी खाद्य सामग्री जब्त की। इतनी बड़ी कीमत का खाद्य स्टॉक जांच के दायरे में आने से त्योहारों के दौरान बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, जब्त किए गए सभी उत्पादों को प्रयोगशाला परीक्षण और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बिना अंतिम रूप से मिलावटी घोषित करना उचित नहीं होगा।
दिवाली के समय बाजारों में खाद्य पदार्थों की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। विशेष रूप से मिठाइयों, नमकीन और तैयार खाद्य उत्पादों की मांग अधिक रहती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, पैकेजिंग और बिक्री के दौरान स्वच्छता तथा गुणवत्ता के मानकों का पालन करना जरूरी है। इनमें लापरवाही होने पर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
महाराष्ट्र में की गई इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू ऑनलाइन खाद्य आपूर्ति और डिलीवरी से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच भी है। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किराना सामान और तैयार खाद्य पदार्थों की खरीदारी बढ़ी है। उपभोक्ता घर बैठे खाद्य उत्पाद मंगवाते हैं, लेकिन उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करना संबंधित कारोबारियों की जिम्मेदारी बनी रहती है।
ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रतिष्ठानों के जांच के दायरे में आने से खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन का मुद्दा फिर चर्चा में है। इसी तरह डी-मार्ट जैसे बड़े रिटेल नेटवर्क और बिरयानी बाय किलो जैसे खाद्य कारोबार से जुड़े नाम भी इस अभियान में सामने आए हैं। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी कंपनी के एक या अधिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होने का अर्थ उसके सभी उत्पादों या सभी शाखाओं को असुरक्षित घोषित करना नहीं है।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के अनुसार, खाद्य कारोबारियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण पर विशेष ध्यान देना होता है। खाद्य सामग्री के निर्माण से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन आवश्यक है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित विभाग निरीक्षण, नमूना परीक्षण, जब्ती और लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई कर सकता है।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में चलाए गए इस विशेष अभियान को त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 105 लाइसेंस निलंबित किए जाने और करोड़ों रुपये की खाद्य सामग्री जब्त होने से यह संकेत मिला है कि विभाग खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से ले रहा है।
इस कार्रवाई के बीच उपभोक्ताओं के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। त्योहारों के दौरान खाद्य सामग्री खरीदते समय उत्पाद की पैकिंग, निर्माण और समाप्ति तिथि, भंडारण की स्थिति तथा विक्रेता की विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर भी सावधानी बरतनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, असुरक्षित या मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी परेशानियां, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए खाद्य सुरक्षा से संबंधित नियम केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था हैं।
महाराष्ट्र में दिवाली से पहले हुई इस बड़ी कार्रवाई ने खाद्य कारोबारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि त्योहारों के दौरान भी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। छोटे दुकानदार हों या बड़े कारोबारी प्रतिष्ठान, सभी के लिए खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक है।
फिलहाल एफडीए की कार्रवाई में 105 खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित होने और 1.35 करोड़ रुपये से अधिक कीमत का संदिग्ध खाद्य स्टॉक जब्त किए जाने का मामला प्रमुखता से सामने आया है। अब संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। जब्त खाद्य सामग्री की जांच और संबंधित मामलों के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होगा कि किन प्रतिष्ठानों पर आगे अतिरिक्त कार्रवाई की आवश्यकता है।