मुंबई। पवई पुलिस द्वारा पकड़े गए कथित इंजीनियरिंग एडमिशन रैकेट मामले में एक नया खुलासा सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का कथित मास्टरमाइंड 32 वर्षीय सोनू कुमार खुद B.Tech डिग्रीधारी है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के बाद उसने कथित तौर पर फर्जी एडमिशन नेटवर्क खड़ा कर लिया।

आरोप है कि सोनू कुमार ने देश के अलग-अलग राज्यों से बेरोजगार इंजीनियरों को अपने साथ जोड़ा और उनके जरिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के नाम पर छात्रों और अभिभावकों से ठगी की योजना बनाई।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस रैकेट में बिहार, हरियाणा, झारखंड और उत्तर प्रदेश के नौ बेरोजगार इंजीनियर कथित तौर पर शामिल थे।

नौकरी नहीं मिली तो शुरू किया कथित नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोनू कुमार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। B.Tech करने के बाद उसने नौकरी की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

इसके बाद उसने कथित रूप से इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर एक नेटवर्क तैयार किया। पुलिस को शक है कि उसने अपनी तकनीकी जानकारी और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़ी समझ का इस्तेमाल इस अवैध काम में किया।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इससे कितने छात्र प्रभावित हुए हैं।

अलग-अलग राज्यों से जोड़े बेरोजगार इंजीनियर

पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार ने अपने साथ काम करने के लिए कई बेरोजगार इंजीनियरों को जोड़ा।

आरोप है कि बिहार, हरियाणा, झारखंड और उत्तर प्रदेश से नौ इंजीनियरों को इस गिरोह में शामिल किया गया था। ये लोग कथित तौर पर छात्रों से संपर्क करने, फर्जी जानकारी देने और एडमिशन प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम करते थे।

पुलिस अब इन सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

एडमिशन के नाम पर ठगी का आरोप

पवई पुलिस को इस मामले में शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को कथित एडमिशन रैकेट के बारे में जानकारी मिली।

आरोप है कि गिरोह के सदस्य छात्रों और उनके परिवारों को अच्छे कॉलेजों में सीट दिलाने का भरोसा देते थे। इसके बदले उनसे बड़ी रकम मांगी जाती थी।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने कितने छात्रों को अपना निशाना बनाया और कितनी रकम की धोखाधड़ी की गई।

कॉलेजों और दस्तावेजों की जांच जारी

मामले की जांच में पुलिस अब संबंधित कॉलेजों, एडमिशन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क में किसी कॉलेज के कर्मचारी या अन्य लोग भी शामिल थे।

इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

बेरोजगारी और फर्जी नेटवर्क का कनेक्शन

पुलिस के शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस मामले में बेरोजगार इंजीनियरों को पैसों का लालच देकर कथित रूप से इस नेटवर्क में शामिल किया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं में नौकरी की कमी का फायदा उठाकर कई बार ऐसे गिरोह उन्हें गलत रास्ते पर ले जाते हैं।

हालांकि, पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपियों की भूमिका कितनी बड़ी थी।

पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच

पवई पुलिस ने इस मामले में आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच का मुख्य फोकस गिरोह की कार्यप्रणाली, संपर्कों और आर्थिक लेनदेन का पता लगाना है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने एडमिशन दिलाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया और क्या किसी फर्जी दस्तावेज या पहचान का सहारा लिया गया।

छात्रों और अभिभावकों को सतर्क रहने की अपील

पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि कॉलेज एडमिशन के दौरान किसी भी एजेंट या अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं।

अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कॉलेज में प्रवेश के लिए आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और संदिग्ध लोगों से सावधान रहना चाहिए।

आगे और खुलासे की संभावना

फिलहाल पवई पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ और जांच के दौरान इस रैकेट से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कितने स्तर तक लोग शामिल थे।

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