पुणे : सोशल मीडिया पर रील बनाकर लोकप्रियता हासिल करने वाले 26 वर्षीय रोहन रामेश्वर जाधव को पुणे साइबर पुलिस ने 10.74 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि जाधव ने ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजने और विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच में अब तक 5,436 बैंक खातों और हांगकांग में बैठे संदिग्ध साइबर संचालकों से संभावित संपर्क की जानकारी सामने आई है।
मूल रूप से छत्रपति संभाजीनगर निवासी रोहन जाधव पुणे के पिंपले गुरव क्षेत्र में रह रहा था। वह सोशल मीडिया पर रील बनाने के साथ सेलिब्रिटी मैनेजमेंट से जुड़ा काम भी करता था। साइबर पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से फरार था। उसके बैंक खातों और आर्थिक संसाधनों पर कार्रवाई के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, उसके खिलाफ लगे आरोपों की जांच जारी है और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।
फर्जी CBI अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डराया
यह मामला जनवरी 2026 में पुणे के भांडारकर रोड निवासी 82 वर्षीय बुजुर्ग से हुई ठगी से जुड़ा है। साइबर अपराधियों ने खुद को ट्राई, सीबीआई और न्यायिक अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। आरोपियों ने दावा किया कि बुजुर्ग के आधार कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग समेत गंभीर अपराधों में हुआ है।
गिरोह ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित को कथित डिजिटल अरेस्ट में रखा। इतना ही नहीं, जालसाजों ने ऑनलाइन अदालत जैसा माहौल भी तैयार किया। आरोपियों ने पैसे को सत्यापन और सुरक्षा के लिए भेजने का झांसा देकर बुजुर्ग से अलग-अलग बैंक खातों में कुल 10.74 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगी की रकम में उनकी जमा पूंजी और सावधि जमा भी शामिल थी।
ATM से निकली रकम ने खोला राज
शिकायत मिलने के बाद पुणे साइबर पुलिस ने बैंक लेनदेन, एटीएम फुटेज और तकनीकी सर्विलांस की जांच शुरू की। पुलिस को पहला महत्वपूर्ण सुराग तब मिला, जब ठगी की रकम का एक हिस्सा एटीएम से निकाला गया। जांच के आधार पर हर्षद सुभाष धानतोले और समर्थ सुरेश देशमुख को फरवरी में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अमर शिवाजी अत्तरगी को भी पुलिस ने पकड़ा।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि बैंक खातों से निकाली गई रकम कथित रूप से रोहन जाधव तक पहुंचाई गई थी। गिरफ्तार आरोपियों पर फर्जी या दूसरों के नाम पर खुलवाए गए खातों को उपलब्ध कराने का भी आरोप है। इन खातों का इस्तेमाल रकम को तेजी से अलग-अलग स्थानों पर भेजकर उसका वास्तविक स्रोत छिपाने के लिए किया गया।
5,436 बैंक खातों का नेटवर्क
जांच में 5,436 बैंक खातों से जुड़ा एक जटिल मनी ट्रेल सामने आया है। पुलिस को संदेह है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को कई हिस्सों में बांटकर आगे भेजने के लिए किया गया। प्रारंभिक जांच में कुछ रकम को डिजिटल संपत्ति में बदलकर विदेश भेजे जाने की जानकारी भी मिली है।
जाधव के बारे में दावा है कि वह टेलीग्राम के माध्यम से हांगकांग और चीन से जुड़े संदिग्ध संचालकों के संपर्क में था। उनके बीच वीडियो कॉल के जरिए बातचीत होती थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या भारतीय मुद्रा को USDT जैसी डिजिटल संपत्ति में बदलकर विदेश भेजा गया और इसके बदले जाधव को कमीशन मिला। [इंडियन एक्सप्रेस](https://indianexpress.com/article/cities/pune/pune-social-media-influencer-held-for-cheating-rs-10-7-crore-in-digital-arrest-scam-10829389/) ने भी पुलिस जांच में सामने आए बैंक खातों के नेटवर्क की जानकारी दी है।
दो शहरों में दर्ज हैं मामले
रोहन जाधव के खिलाफ पुणे और पिंपरी चिंचवड़ पुलिस क्षेत्र में आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों, क्रिप्टो लेनदेन और विदेशी संपर्कों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी का नेटवर्क देश में हुई अन्य डिजिटल अरेस्ट ठगी की घटनाओं से जुड़ा है या नहीं।