केंद्र ने 2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन को NDPS के तहत नियंत्रित पदार्थ घोषित किया
Mumbai मुंबई : नई दिल्ली में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन’ (2-Bromo-4-Methylpropiophenone) को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत नियंत्रित पदार्थ घोषित कर दिया है। यह रसायन उन रासायनिक पदार्थों में शामिल है जिनका उपयोग अवैध नशीले पदार्थ मेफेड्रोन या MD के निर्माण में किया जाता है। इस फैसले को नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, इस केमिकल के निर्माण, वितरण, बिक्री, खरीद, कब्जे, भंडारण, उपयोग, आयात और निर्यात से जुड़ी सभी गतिविधियों पर अब सख्त निगरानी और नियंत्रण लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पदार्थ से जुड़ा कोई भी कार्य अब बिना पंजीकरण के नहीं किया जा सकेगा।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति या संस्था इस रसायन के किसी भी चरण में शामिल हैं, उन्हें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के संबंधित ज़ोनल डायरेक्टर से रजिस्ट्रेशन नंबर लेना अनिवार्य होगा। यह नियम न केवल पारंपरिक व्यापारिक गतिविधियों पर लागू होगा, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाली गतिविधियों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस रसायन की बिक्री या वितरण करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को भी इस नियम के दायरे में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले अवैध लेन-देन और तस्करी पर रोक लगाना है।
अधिसूचना में कहा गया है, “ऐसी सभी फर्मों से अनुरोध है कि वे रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन 7 अगस्त या उससे पहले जमा करें ताकि रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किए जा सकें।” इस समयसीमा को सभी संबंधित संस्थाओं के लिए अनिवार्य बताया गया है।
इसके अलावा, सरकार ने सभी निर्माताओं, व्यापारियों, वितरकों, आयातकों, निर्यातकों, उपभोक्ताओं और इस पदार्थ का स्टॉक रखने वाले अन्य सभी व्यक्तियों और संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे 10 जुलाई तक अपनी पूरी इन्वेंट्री यानी स्टॉक का विस्तृत विवरण संबंधित प्राधिकरण को जमा करें।
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि इस रसायन की उपलब्धता और उसके उपयोग पर पारदर्शी निगरानी रखी जा सके और अवैध गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके। NDPS एक्ट के तहत किसी भी पदार्थ को नियंत्रित सूची में शामिल करने के बाद उसकी खरीद-बिक्री और उपयोग पर सख्त कानूनी नियंत्रण लागू हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के रसायनों पर नियंत्रण से सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण नेटवर्क को काफी हद तक कमजोर किया जा सकता है। मेफेड्रोन जैसे नशीले पदार्थों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की सप्लाई पर रोक लगने से अवैध ड्रग कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह आवश्यक हो गया था कि ऑनलाइन माध्यमों पर भी सख्त निगरानी रखी जाए। इसी कारण अधिसूचना में स्पष्ट रूप से वेबसाइट और सोशल मीडिया को भी शामिल किया गया है।
फिलहाल, सभी संबंधित पक्षों से अपेक्षा की गई है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें और अपने स्टॉक की जानकारी उपलब्ध कराएं। सरकार ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर NDPS एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम देश में नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण और रासायनिक सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।