मुंबई। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने मुंबई में फुटबॉल मैदान के किराए में कथित भारी बढ़ोतरी को लेकर बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। यह विवाद उन खबरों के बाद सामने आया है, जिनमें दावा किया गया कि मुंबई सिटी एफसी से एक मैच के लिए लिया जाने वाला किराया पिछले दो सीजन के मुकाबले करीब 250 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। कथित तौर पर पहले प्रति गेम करीब 10 लाख रुपये का किराया लिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 35 लाख रुपये किया जा रहा है।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के बजाय मैदानों से राजस्व कमाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों से मुंबई में फुटबॉल को नुकसान हो सकता है और पेशेवर फुटबॉल क्लबों के लिए घरेलू मैच आयोजित करना महंगा हो जाएगा।
आदित्य ठाकरे ने साधा निशाना
आदित्य ठाकरे ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मुंबई में फुटबॉल को खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को खेलों को बढ़ावा देने के बजाय मैदानों का इस्तेमाल इवेंट और शो के लिए किराए पर देकर पैसा कमाने में ज्यादा दिलचस्पी है।
उन्होंने खास तौर पर मुंबई सिटी एफसी और इंडियन सुपर लीग (ISL) का जिक्र करते हुए कहा कि क्लब से बहुत अधिक शुल्क मांगा जा रहा है। ठाकरे ने इस फैसले को शर्मनाक बताते हुए नगर निकाय की नीति पर सवाल उठाया।
उनका आरोप है कि यदि किसी पेशेवर फुटबॉल टीम के लिए अपने ही शहर में घरेलू मुकाबले आयोजित करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो जाता है, तो इसका सीधा असर मुंबई के फुटबॉल ढांचे और खेल संस्कृति पर पड़ सकता है।
10 लाख से 35 लाख रुपये तक पहुंचा किराया
विवाद का मुख्य मुद्दा मैदान के किराए में कथित बढ़ोतरी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मुंबई सिटी एफसी को दो सीजन पहले एक मैच के लिए करीब 10 लाख रुपये किराया देना पड़ता था। अब यह रकम बढ़ाकर 35 लाख रुपये प्रति मैच किए जाने की बात सामने आई है।
यदि यह बढ़ोतरी लागू होती है तो क्लब को प्रत्येक घरेलू मैच के आयोजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। पूरे सीजन में कई घरेलू मुकाबले होने के कारण कुल खर्च में काफी वृद्धि हो सकती है।
किस मैदान और किन शर्तों के तहत यह शुल्क तय किया गया है, इसके बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। हालांकि, किराए में कथित वृद्धि को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है।
मैदानों के इस्तेमाल को लेकर सवाल
आदित्य ठाकरे ने मैदानों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि खेलों के लिए उपलब्ध मैदानों को नियमित खेल गतिविधियों की तुलना में इवेंट और मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
उनका कहना है कि मुंबई जैसे बड़े महानगर में खेलों के लिए पर्याप्त मैदान पहले से ही सीमित हैं। ऐसे में यदि उपलब्ध खेल सुविधाओं की लागत बढ़ती है, तो इसका असर खिलाड़ियों, क्लबों और युवा खेल प्रतिभाओं पर पड़ सकता है।
फुटबॉल क्लबों के लिए घरेलू मैदान केवल मैच आयोजित करने की जगह नहीं होता, बल्कि वह स्थानीय प्रशंसकों, खिलाड़ियों और क्लब की पहचान से भी जुड़ा होता है। ऐसे में घरेलू मैदान के किराए में बड़ी वृद्धि क्लब के संचालन और प्रशंसकों के अनुभव दोनों को प्रभावित कर सकती है।
मुंबई सिटी एफसी पर बढ़ सकता है आर्थिक दबाव
मुंबई सिटी एफसी इंडियन सुपर लीग में मुंबई का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख फुटबॉल टीम है। क्लब को अपने घरेलू मैच आयोजित करने के लिए मैदान, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ता है।
ऐसे में यदि मैदान का किराया 10 लाख से बढ़कर 35 लाख रुपये प्रति मैच हो जाता है तो मैच आयोजन की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। क्लब को इसका भार अन्य खर्चों के साथ संतुलित करना होगा।
हालांकि, केवल मैदान के किराए में बढ़ोतरी को क्लब की पूरी आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। टिकट बिक्री, प्रायोजन, प्रसारण अधिकार और अन्य व्यावसायिक आय भी क्लब के वित्तीय मॉडल का हिस्सा होते हैं। फिर भी, घरेलू मैदान की लागत में इतनी बड़ी वृद्धि एक महत्वपूर्ण परिचालन मुद्दा बन सकती है।
फुटबॉल प्रेमियों के बीच भी चर्चा
मुंबई में फुटबॉल का पुराना प्रशंसक आधार है और मुंबई सिटी एफसी के घरेलू मैचों में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। ऐसे में मैदान से जुड़े शुल्क का मुद्दा केवल क्लब और नगर निकाय के बीच वित्तीय विवाद तक सीमित नहीं रह सकता।
खेल प्रशंसकों का एक वर्ग यह सवाल उठा सकता है कि शहर में खेलों के विकास के लिए सार्वजनिक मैदानों की फीस ऐसी होनी चाहिए जो पेशेवर और जमीनी स्तर के खेलों को बढ़ावा दे।
दूसरी ओर, नगर निकायों के सामने मैदानों के रखरखाव, सुरक्षा, बिजली, सफाई और अन्य सुविधाओं पर होने वाले खर्च को पूरा करने की जिम्मेदारी भी होती है। इसलिए किराए का निर्धारण इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाना जरूरी है।
राजनीतिक विवाद बढ़ने के आसार
मैदान के किराए का मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है। आदित्य ठाकरे के आरोपों के बाद भाजपा और नगर निकाय की ओर से प्रतिक्रिया आने पर विवाद और बढ़ सकता है।
ठाकरे ने अपने बयान के जरिए यह मुद्दा उठाने की कोशिश की है कि मुंबई को खेलों का शहर बनाने के बजाय मैदानों को व्यावसायिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल करने की नीति अपनाई जा रही है। उनका आरोप है कि इससे फुटबॉल जैसे खेलों को नुकसान पहुंचेगा।
फिलहाल विवाद का केंद्र प्रति मैच 35 लाख रुपये के कथित किराए और उसके मुकाबले पहले लिए जाने वाले 10 लाख रुपये के शुल्क के बीच का बड़ा अंतर है। आने वाले दिनों में BMC की ओर से शुल्क वृद्धि के कारण और आधिकारिक नियम स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है।
यदि किराया बढ़ोतरी की पुष्टि होती है, तो मुंबई में पेशेवर फुटबॉल मैचों के आयोजन की लागत को लेकर बहस और तेज हो सकती है। वहीं, आदित्य ठाकरे के बयान ने इस मुद्दे को खेल नीति और शहर में खेल सुविधाओं के भविष्य से जोड़ दिया है।