मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। किडनी की बीमारी से पीड़ित 21 वर्षीय युवक की अस्पताल ले जाते समय एम्बुलेंस में मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि एम्बुलेंस में रखा ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था, जिसके कारण समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल सकी और युवक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
घटना के बाद शुक्रवार को एक वीडियो भी सामने आया, जिसने पूरे मामले को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। वीडियो में युवक एम्बुलेंस के अंदर अपने माता-पिता के बीच बैठा दिखाई देता है। उसकी हालत बेहद गंभीर नजर आती है। वह बार-बार आगे की ओर झुक रहा है और बेहोशी की अवस्था में दिखाई देता है, जबकि उसके माता-पिता उसे संभालने और सहारा देने की कोशिश करते हुए नजर आते हैं।
परिजनों का कहना है कि युवक लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहा था और उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल ले जाया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस में मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था। यदि समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध होती तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
परिवार के सदस्यों ने इस घटना को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस में सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है और इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य आरोपों की पुष्टि नहीं करते, लेकिन इसने घटना को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस में ऑक्सीजन, जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ का होना अत्यंत आवश्यक है। यदि इनमें किसी प्रकार की कमी रहती है तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
मंडला जिले में हुई इस घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि एम्बुलेंस सेवाओं की नियमित जांच और उपकरणों की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जानकारी मिलने के बाद आवश्यक तथ्यों को एकत्र करना शुरू कर दिया है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस बीच, मृतक के परिजनों ने सरकार से आर्थिक सहायता देने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी अन्य परिवार को इस तरह की पीड़ा का सामना न करना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।
यह घटना बताती है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में छोटी-सी लापरवाही भी किसी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं की नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। प्रशासन की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं। तब तक यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता रहेगा।