इंदौर। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई में कार्यरत कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और उनके रिटायरमेंट को सम्मानजनक बनाने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के असिस्टेंट मैनेजर अभिषेक धीमान ने कहा कि नियमित और दीर्घकालीन निवेश के माध्यम से एनपीएस कर्मचारियों के भविष्य के लिए मजबूत आर्थिक आधार तैयार कर सकता है।
अभिषेक धीमान गुरुवार को पीएफआरडीए और एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्य प्रदेश की ओर से आयोजित एनपीएस जागरूकता कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के प्रतिनिधियों तथा उद्यमियों के लिए आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य उद्योगों को एनपीएस की विशेषताओं, पंजीकरण की प्रक्रिया, निवेश के विकल्पों और कर्मचारियों को मिलने वाले संभावित लाभों के बारे में जानकारी देना था।
कार्यशाला में धीमान ने कहा कि कामकाजी जीवन के दौरान नियमित रूप से की गई छोटी बचत भी लंबे समय में बड़ी राशि का रूप ले सकती है। एनपीएस कर्मचारियों को व्यवस्थित तरीके से रिटायरमेंट के लिए निवेश करने का अवसर देता है। उन्होंने उद्यमियों से अपील की कि वे अपने संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को केवल वर्तमान आय तक सीमित न रखें, बल्कि भविष्य की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियमित निवेश के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि असंगठित या छोटे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने रिटायरमेंट के बाद आय का स्थायी साधन नहीं होने की चुनौती रहती है। ऐसी स्थिति में एनपीएस जैसे विकल्प उपयोगी साबित हो सकते हैं। कर्मचारी अपनी आय और आर्थिक क्षमता के अनुसार इसमें योगदान कर सकते हैं। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने से रिटायरमेंट के समय एकमुश्त राशि और नियमित पेंशन की व्यवस्था बनाने में सहायता मिल सकती है।
एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्य प्रदेश के अध्यक्ष योगेश मेहता ने भी एमएसएमई क्षेत्र में एनपीएस को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसी उद्योग की सफलता में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए संस्थानों को कर्मचारियों की मौजूदा सुविधाओं के साथ उनकी दीर्घकालीन वित्तीय सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। एनपीएस कर्मचारियों के कल्याण से जुड़ी इस जिम्मेदारी को पूरा करने का एक प्रभावी माध्यम हो सकता है।
मेहता ने कहा कि एमएसएमई इकाइयां रोजगार सृजन में बड़ा योगदान देती हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी काम करते हैं, जिनके पास सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त बचत या पेंशन की सुविधा उपलब्ध नहीं होती। यदि उद्योग अपने कर्मचारियों को समय रहते एनपीएस और अन्य वित्तीय योजनाओं के बारे में जागरूक करें तो वे भविष्य के लिए बेहतर आर्थिक योजना बना सकेंगे।
कार्यशाला में स्टेट बैंक पेंशन फंड और यूटीआई पेंशन फंड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने उपस्थित उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों को एनपीएस खाता खोलने तथा पंजीकरण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रतिनिधियों ने बताया कि एनपीएस में निवेश शुरू करने के लिए आवश्यक दस्तावेज, नामांकन और योगदान से जुड़ी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
विशेषज्ञों ने एनपीएस के अंतर्गत उपलब्ध निवेश विकल्पों के बारे में भी बताया। निवेशक अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और उम्र के अनुसार इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड तथा सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े विकल्प चुन सकते हैं। इसमें निवेश का आवंटन स्वयं निर्धारित करने और उम्र के आधार पर स्वचालित रूप से बदलने वाले विकल्प भी उपलब्ध होते हैं। हालांकि, निवेश बाजार से जुड़ा होने के कारण रिटर्न की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती।
प्रतिनिधियों ने एनपीएस से जुड़ी कर छूट के प्रावधानों की जानकारी भी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर लाभ निवेशक की श्रेणी, चुनी गई कर व्यवस्था और उस समय लागू आयकर नियमों पर निर्भर करते हैं। इसलिए कर्मचारियों और नियोक्ताओं को निवेश करने से पहले लागू नियमों को समझने तथा जरूरत होने पर वित्तीय या कर सलाहकार से मार्गदर्शन लेने की सलाह दी गई।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि एनपीएस केवल बड़ी कंपनियों या सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। निजी क्षेत्र, एमएसएमई और विभिन्न व्यावसायिक संस्थानों में काम करने वाले लोग भी निर्धारित नियमों के अनुसार इसका लाभ उठा सकते हैं। नियोक्ता अपने कर्मचारियों को कॉरपोरेट एनपीएस व्यवस्था के माध्यम से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।
पेंशन फंड के प्रतिनिधियों ने एमएसएमई और औद्योगिक इकाइयों में एनपीएस जागरूकता शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। इन शिविरों में कर्मचारियों को सरल भाषा में खाता खोलने, निवेश शुरू करने, नियमित योगदान करने, नामांकन दर्ज करने और रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लाभों की जानकारी दी जाएगी। कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान करने के लिए विशेषज्ञों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जा सकती है।
औद्योगिक इकाइयों में शिविर लगाए जाने से उन कर्मचारियों तक सीधे जानकारी पहुंच सकेगी, जिन्हें वित्तीय योजनाओं की पर्याप्त समझ नहीं है। उद्योग प्रबंधन वेतन के साथ बचत और पेंशन योजना की जानकारी देकर कर्मचारियों में वित्तीय अनुशासन विकसित करने में मदद कर सकता है। नियमित योगदान की आदत कर्मचारियों को भविष्य में आकस्मिक खर्च और रिटायरमेंट से जुड़ी जरूरतों के लिए तैयार कर सकती है।
कार्यशाला के दौरान उद्यमियों को यह संदेश दिया गया कि कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को खर्च के बजाय दीर्घकालीन निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। भविष्य को लेकर आश्वस्त कर्मचारी संस्थान से अधिक जुड़ाव महसूस कर सकते हैं। इससे कार्यस्थल पर स्थिरता, विश्वास और उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
पीएफआरडीए और एआईएमपी की इस पहल का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में पेंशन योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। आयोजकों ने उद्योगों से कर्मचारियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और नियमित निवेश को प्रोत्साहित करने की अपील की। कार्यशाला में एनपीएस को कर्मचारियों के सुरक्षित तथा सम्मानजनक रिटायरमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बताया गया।