इंदौर। वन विभाग की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने गुरुवार को इंदौर में कछुओं की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग प्रजातियों के करीब 30 कछुए बरामद किए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों आरोपी संरक्षित वन्यजीवों को बेचने के लिए ग्राहकों की तलाश कर रहे थे। कार्रवाई के बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कछुओं को कहां से लाया गया था और इनके पीछे तस्करी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर लाल सुधाकर सिंह को कछुआ तस्करी से जुड़ी गतिविधियों की सूचना मिली थी। सूचना में बताया गया था कि कुछ लोग संरक्षित कछुओं को बेचने के लिए संभावित खरीदारों से संपर्क कर रहे हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की एक विशेष टीम गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसके बाद अधिकारियों ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी और सूचना की पुष्टि के बाद कार्रवाई की योजना तैयार की। टीम ने मूसाखेड़ी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए केशव शर्मा और रोहन गौर को पकड़ लिया। दोनों की पहचान मूसाखेड़ी निवासी के रूप में की गई है। तलाशी के दौरान टीम को उनके पास से अलग-अलग प्रजातियों के 30 कछुए मिले, जिन्हें वन विभाग ने जब्त कर लिया।

अधिकारियों के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में तस्करी के काम में दोनों की अलग-अलग भूमिका सामने आई है। केशव शर्मा कथित तौर पर कछुओं को बेचने के लिए ग्राहकों से संपर्क करता था और उनके लिए खरीदार तलाशता था। वहीं, रोहन गौर की जिम्मेदारी कथित तौर पर कछुओं और अन्य वन्यजीवों को ग्राहकों तक पहुंचाने की थी। इस तरह दोनों मिलकर संरक्षित वन्यजीवों की खरीद-फरोख्त का काम कर रहे थे।

वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि बरामद किए गए कछुए किन क्षेत्रों से पकड़े गए और उन्हें इंदौर तक कैसे पहुंचाया गया। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या इस नेटवर्क में अन्य व्यक्ति भी सक्रिय हैं। अधिकारियों को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपियों के पीछे एक बड़ा तस्करी नेटवर्क हो सकता है, जिसकी कड़ियों तक पहुंचने के लिए पूछताछ की जा रही है।

कछुओं की तस्करी वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से गंभीर मामला है। कई कछुआ प्रजातियां संरक्षित श्रेणी में आती हैं और इनके अवैध शिकार, पकड़ने, रखने या व्यापार पर कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। वन्यजीव तस्करी से न केवल संबंधित प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा होता है, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित होता है। इसी वजह से वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियां ऐसे मामलों में लगातार निगरानी रखती हैं।

बरामद किए गए 30 कछुओं को फिलहाल वन विभाग की निगरानी में रखा गया है। उनकी प्रजाति, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी विवरणों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद सक्षम अधिकारियों के निर्देश के अनुसार उनके संरक्षण और आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

वन विभाग की इस कार्रवाई को वन्यजीव तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि संरक्षित वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अब तस्करी के स्रोत, संभावित खरीदारों और पूरे नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

गुरुवार की कार्रवाई ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीवों की अवैध तस्करी पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। वन विभाग की टीम अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है, ताकि कछुओं की तस्करी के इस नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके और इसमें शामिल अन्य लोगों तक भी पहुंच बनाई जा सके।

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