जबलपुर। त्योहारी सीजन से पहले जबलपुर में चीनी की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है। पिछले करीब 20 से 22 दिनों में चीनी के दाम 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गए हैं। थोक कारोबारियों के मुताबिक, कुछ समय पहले करीब 45-46 रुपये किलो बिकने वाली चीनी अब लगभग 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है।

चीनी रोजमर्रा के खानपान में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख वस्तुओं में शामिल है। चाय-कॉफी से लेकर मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और विभिन्न घरेलू व्यंजनों में इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसकी कीमत में अचानक हुई वृद्धि का असर सीधे आम परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ रहा है।

तीन सप्ताह में तेजी से बढ़े दाम

थोक व्यापारियों के अनुसार, चीनी के दाम में यह बढ़ोतरी बेहद कम समय में हुई है। करीब तीन सप्ताह पहले तक बाजार में चीनी की कीमत लगभग 45 से 46 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास थी। इसके बाद धीरे-धीरे कीमतों में तेजी आई और अब यह लगभग 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है।

व्यापारियों का कहना है कि इतनी तेज और बड़ी बढ़ोतरी की उन्हें भी उम्मीद नहीं थी। बाजार में कीमतों में बदलाव के साथ खुदरा स्तर पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। थोक बाजार से बढ़ी हुई कीमत पर खरीदारी होने के कारण दुकानदारों के लिए पुराने भाव पर चीनी बेचना मुश्किल हो रहा है।

आम परिवारों का बढ़ा खर्च

चीनी की कीमत बढ़ने का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनका मासिक बजट पहले से ही महंगाई के दबाव में है। रोजाना चाय पीने वाले परिवारों से लेकर घर में मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने वाले लोगों तक, सभी को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

छोटी मात्रा में कीमत बढ़ने पर भले ही अंतर कम दिखाई दे, लेकिन जब किसी परिवार को महीने भर के लिए चीनी खरीदनी होती है तो बढ़ी हुई कीमत का असर स्पष्ट नजर आता है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम में इस तरह की बढ़ोतरी चिंता का विषय बन सकती है।

चाय से मिठाई तक बढ़ेगा असर

चीनी की कीमत केवल घर के रसोई खर्च तक सीमित नहीं रहती। इसका इस्तेमाल चाय की दुकानों, मिठाई की दुकानों, बेकरी और अन्य खाद्य कारोबार में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए चीनी महंगी होने से इन कारोबारियों की लागत भी बढ़ती है।

यदि कीमतों में बढ़ोतरी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका प्रभाव मिठाई, चाय और चीनी से तैयार होने वाले दूसरे उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इससे उपभोक्ताओं को एक ही वस्तु की बढ़ी कीमत के साथ-साथ उससे जुड़े अन्य उत्पादों के लिए भी अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।

कारोबारियों के लिए भी बढ़ी चुनौती

थोक व्यापारियों के मुताबिक, बाजार में इतनी तेज कीमत वृद्धि ने कारोबारियों की मुश्किलें भी बढ़ाई हैं। अचानक दाम बढ़ने के कारण स्टॉक और बिक्री की योजना बनाना कठिन हो गया है। व्यापारी आमतौर पर मांग, आपूर्ति और बाजार भाव के आधार पर माल खरीदते हैं, लेकिन कम समय में कीमतों में बड़े बदलाव से कारोबार पर अनिश्चितता बढ़ जाती है।

खुदरा दुकानदारों के सामने भी चुनौती है। उन्हें थोक बाजार से जिस कीमत पर चीनी मिल रही है, उसी के अनुसार खुदरा भाव तय करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, ग्राहक बढ़ी कीमत को लेकर सवाल कर रहे हैं। इससे दुकानदारों और ग्राहकों के बीच कीमत को लेकर बातचीत बढ़ने की संभावना है।

त्योहारों से पहले चिंता

आने वाले त्योहारों के मद्देनजर चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने के साथ-साथ बाजार में मिठाई और बेकरी उत्पादों की बिक्री भी बढ़ती है। ऐसे समय में चीनी के दाम में अचानक आई तेजी ने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

यदि कीमतों में और वृद्धि होती है तो त्योहारों के दौरान मिठाइयों और चीनी आधारित खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर अंततः ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है।

कीमतों पर नजर रखने की जरूरत

चीनी की कीमतों में तेजी के बीच बाजार की स्थिति पर नजर रखना जरूरी हो गया है। उपभोक्ताओं को भी खरीदारी करते समय अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की जानकारी लेने और जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करने की सलाह दी जा सकती है।

वहीं, कारोबारियों का कहना है कि बाजार में कीमतों की स्थिति स्पष्ट होने और आपूर्ति सामान्य रहने पर आगे भाव में स्थिरता आ सकती है। हालांकि, फिलहाल करीब 20-22 दिनों में 20 से 25 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

जबलपुर में चीनी का भाव 45-46 रुपये से बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंचना महंगाई के दबाव को और बढ़ाने वाला है। रोजमर्रा की जरूरत की इस वस्तु के महंगे होने से घरों के बजट के साथ-साथ मिठाई, चाय और अन्य खाद्य कारोबार की लागत पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। अब उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में चीनी के दाम स्थिर होते हैं या कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी रहता है।

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