इंदौर। पश्चिमी भारत में पुलिस व्यवस्था और अंतरराज्यीय सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने की दिशा में शुक्रवार को इंदौर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अहम बैठक हुई। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘पश्चिमी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति’ की 13वीं बैठक में सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में साइबर अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के बढ़ते नेटवर्क से निपटने के लिए राज्यों के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त रणनीति बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने की। इसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने बदलते अपराध के तौर-तरीकों पर चर्चा करते हुए यह माना कि सीमाओं से परे सक्रिय अपराधी नेटवर्क से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए राज्यों के बीच तत्काल सूचना साझा करना और संयुक्त कार्रवाई जरूरी है।
साइबर अपराध से निपटने पर फोकस
बैठक में साइबर अपराध को पश्चिमी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया। डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ साइबर ठगी, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल पहचान के दुरुपयोग और दूसरे साइबर अपराधों के मामलों में लगातार नए तरीके सामने आ रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों ने साइबर अपराध से संबंधित सूचनाओं को तेजी से साझा करने और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा की। अधिकारियों का मानना है कि साइबर अपराधी एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बना सकते हैं। ऐसे मामलों में केवल स्थानीय स्तर की पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती।
इसी वजह से रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इसका उद्देश्य यह है कि किसी राज्य में सामने आए साइबर अपराध या संगठित अपराध से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दूसरे राज्यों की पुलिस तक जल्द पहुंच सके।
ड्रग नेटवर्क पर संयुक्त कार्रवाई
बैठक में नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पश्चिमी भारत के कई राज्य देश के प्रमुख परिवहन मार्गों से जुड़े हैं। ऐसे में मादक पदार्थों की आवाजाही रोकना पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
अधिकारियों ने ड्रग तस्करी के नेटवर्क की पहचान करने, संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखने और अलग-अलग राज्यों में सक्रिय गिरोहों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने पर सहमति जताई।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ड्रग नेटवर्क अक्सर एक राज्य में सप्लाई चैन विकसित करके दूसरे राज्य में इसकी खपत या वितरण करते हैं। ऐसे मामलों में राज्यों के बीच सूचना का त्वरित आदान-प्रदान जांच को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संगठित अपराध पर भी नजर
बैठक में संगठित अपराध के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अपराधी गिरोहों की गतिविधियां पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गई हैं। ऐसे गिरोह अलग-अलग राज्यों में अपने नेटवर्क संचालित कर सकते हैं और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग लोगों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसी कारण राज्यों के पुलिस प्रमुखों ने आपसी सहयोग बढ़ाने और संयुक्त ऑपरेशन को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। अपराधियों के बीच संपर्क, वित्तीय लेनदेन और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी सूचनाओं को साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा योजना पर चर्चा
इंदौर में आयोजित इस बैठक में सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा व्यवस्था भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ में देश और दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में आयोजन से पहले व्यापक सुरक्षा योजना तैयार करना जरूरी माना जा रहा है।
अधिकारियों ने सिंहस्थ के दौरान संभावित भीड़ प्रबंधन, अंतरराज्यीय यातायात, अपराध नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने के लिए समन्वित रणनीति पर चर्चा की। चूंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु अलग-अलग राज्यों से उज्जैन पहुंचेंगे, इसलिए विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच सूचना और सुरक्षा संबंधी समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
सिंहस्थ के दौरान आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ किसी भी आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच तेजी से संपर्क स्थापित करना भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा।
रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग पर जोर
बैठक में रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने माना कि अपराध के बदलते स्वरूप में केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। संभावित अपराध और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय रहते साझा होने से पुलिस को कार्रवाई के लिए अधिक समय मिल सकता है।
इसके लिए राज्यों के बीच सूचना साझा करने के मौजूदा तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई। तकनीकी माध्यमों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए पुलिस बलों के बीच तेज संचार व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
संयुक्त ऑपरेशन को बनाया जाएगा प्रभावी
पुलिस अधिकारियों ने अंतरराज्यीय अपराधियों और नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने पर भी सहमति जताई। किसी एक राज्य में अपराध करने के बाद दूसरे राज्य में छिपने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में राज्यों के बीच सहयोग बेहद जरूरी होता है।
बैठक में इस तरह के मामलों में स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय, संदिग्धों की जानकारी साझा करने और आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त कार्रवाई की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
पश्चिमी क्षेत्र में बढ़ेगा पुलिस समन्वय
मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा जैसे राज्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनके बीच बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में अपराधी नेटवर्क भी अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय हो सकते हैं।
पश्चिमी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति की बैठक का उद्देश्य इसी चुनौती से निपटने के लिए पुलिस बलों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है। दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के शामिल होने से केंद्र शासित क्षेत्रों के साथ भी समन्वय मजबूत करने का अवसर मिला।
बदलते अपराध के मुताबिक रणनीति जरूरी
बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अपराध के तौर-तरीके लगातार बदल रहे हैं। साइबर तकनीक, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और आधुनिक संचार माध्यमों के इस्तेमाल ने अपराध की प्रकृति को भी बदल दिया है।
ऐसे में पुलिस को पारंपरिक जांच पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीक और अंतरराज्यीय सहयोग का इस्तेमाल करना होगा। अधिकारियों ने माना कि साझा रणनीति, त्वरित सूचना आदान-प्रदान और संयुक्त अभियान के जरिए ही बदलते अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
इंदौर में हुई यह बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सिंहस्थ-2028 जैसे बड़े धार्मिक आयोजन की सुरक्षा से लेकर साइबर अपराध, ड्रग तस्करी और संगठित अपराध तक, पश्चिमी क्षेत्र की पुलिस ने आपसी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है। आने वाले समय में इन फैसलों को जमीन पर लागू करना पुलिस और प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।