इंदौर। मशहूर शायर अबरार अहमद काशिफ ने नई पीढ़ी यानी Gen Z और Gen Alpha को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की सोच और बातों को समझने की जरूरत है। केवल इसलिए उनकी नीयत पर सवाल नहीं उठाया जा सकता क्योंकि उनकी भाषा या विचार पुराने नजरिए से अलग हैं।
इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब मध्य प्रदेश के कार्यक्रम ‘रूबरू’ में शामिल हुए शायर अबरार अहमद काशिफ ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने करीब एक घंटे तक पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और साहित्य, भाषा, संस्कृति तथा नई पीढ़ी को लेकर अपने विचार साझा किए।
Gen Z की सोच को समझने की जरूरत
अबरार अहमद काशिफ ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन उनकी नीयत पर शक करना सही नहीं है।
उन्होंने कहा, “हम Gen Z की नीयत पर शक नहीं कर सकते। भले ही उनकी कुछ बातें हमें कभी-कभी गलत लग सकती हैं, लेकिन जब हम उन्हें ध्यान से सुनते हैं तो कई बार महसूस होता है कि उनकी बात में दम है।”
उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी अपने समय के हिसाब से सोचती है और समाज में बदलाव लाती है। इसलिए नई पीढ़ी के विचारों को समझने के लिए संवाद जरूरी है।
Gen Z और Gen Alpha ज्यादा जागरूक
शायर काशिफ ने कहा कि वर्तमान समय में Gen Z और Gen Alpha पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक हैं। वे समाज, तकनीक और अपने अधिकारों को लेकर अधिक जानकारी रखते हैं।
उन्होंने कहा कि समाज के लिए यह समझना जरूरी है कि युवा आखिर क्या कहना चाहते हैं। केवल उनके बोलने के तरीके या विचारों को देखकर उन्हें खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं की सोच में बदलाव समय की जरूरत है और समाज को इस बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
हर पीढ़ी लाती है बदलाव
अबरार अहमद काशिफ ने कहा कि दुनिया में हर पीढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति में नए बदलाव लेकर आती है।
उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति हमेशा स्थिर नहीं रहतीं, बल्कि समय के साथ बदलती रहती हैं। नई पीढ़ी अपने अनुभवों और सोच के आधार पर इसमें नए रंग जोड़ती है।
उन्होंने कहा, “हम बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं।” इस बदलाव को समझना और स्वीकार करना समाज के विकास के लिए जरूरी है।
शाजापुर के नातिया मुशायरे में भी हुए शामिल
अबरार अहमद काशिफ शाजापुर में आयोजित एक नातिया मुशायरे में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की।
उन्होंने साहित्य और समाज से जुड़े कई विषयों पर अपने विचार रखे। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले काशिफ ने पत्रकारों के सवालों का खुलकर जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि साहित्य हमेशा समाज का आईना रहा है और बदलते समय के साथ साहित्यकारों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
साहित्य और समाज के रिश्ते पर रखी बात
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच को दिशा देने का काम करता है।
उन्होंने कहा कि शायर और लेखक अपने शब्दों के माध्यम से समाज की भावनाओं और समस्याओं को सामने लाते हैं। इसलिए साहित्य में आने वाले बदलावों को भी समय के बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए।
युवाओं और बुजुर्गों के बीच संवाद जरूरी
काशिफ ने कहा कि नई और पुरानी पीढ़ी के बीच संवाद होना बेहद जरूरी है। कई बार पीढ़ियों के बीच सोच का अंतर गलतफहमी पैदा कर देता है।
उन्होंने कहा कि अगर बुजुर्ग युवा पीढ़ी को सुनेंगे और युवा पुरानी पीढ़ी के अनुभवों को समझेंगे तो समाज में बेहतर तालमेल बन सकता है।
उन्होंने युवाओं की ऊर्जा और बुजुर्गों के अनुभव को समाज के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों ने की सराहना
स्टेट प्रेस क्लब मध्य प्रदेश के कार्यक्रम ‘रूबरू’ में अबरार अहमद काशिफ के विचारों को साहित्य प्रेमियों और पत्रकारों ने सराहा।
उनकी बातचीत में साहित्य के साथ-साथ सामाजिक बदलाव, युवा सोच और संस्कृति के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बदलाव से डरने के बजाय उसे समझने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि हर बदलाव अपने साथ नई संभावनाएं लेकर आता है।