Ganga दशहरा पर इंदौर के अन्नपूर्णा तालाब में 1.50 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि पूजन

Update: 2026-05-26 05:03 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : गंगा दशहरा के अवसर पर सोमवार को इंदौर के अन्नपूर्णा तालाब परिसर में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान तालाब के विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़े लगभग 1.50 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमि पूजन किया गया।

कार्यक्रम में तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की शुरुआत की गई। इनमें छठ पूजा घाट का विकास, मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण और जल संरक्षण से संबंधित अन्य आधारभूत ढांचे शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में जल संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना और तालाब क्षेत्र को एक व्यवस्थित और आकर्षक स्वरूप देना है।

इस अवसर पर धार्मिक परंपरा के अनुसार तालाब की पूजा भी की गई। कार्यक्रम में जल गंगा संवर्धन अभियान के संदेश को आगे बढ़ाते हुए जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव और विधायक मधु वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि, नगर निगम के अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

इस मौके पर उपस्थित लोगों को जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे पानी की बचत करेंगे और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

मंत्री तुलसी सिलावट ने अपने संबोधन में कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है और ऐसे अभियानों के माध्यम से जनता में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि तालाबों और जल स्रोतों का विकास शहर की पर्यावरणीय संतुलन व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर लगातार स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी रहा है और ऐसे प्रोजेक्ट शहर को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि अन्नपूर्णा तालाब का विकास स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा और आकर्षण केंद्र बनेगा।

स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया और कहा कि तालाब के सौंदर्यीकरण से क्षेत्र में न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुल मिलाकर, गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम जल संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण रहा, जिसमें विकास कार्यों की शुरुआत के साथ पर्यावरण जागरूकता का संदेश भी दिया गया।

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