भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 16 जुलाई को नाम वापसी के बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। इस बार दतिया में चुनाव विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद तैयार की गई नई मतदाता सूची के आधार पर कराया जाएगा।
SIR प्रक्रिया के बाद दतिया विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई है। पुनरीक्षण से पहले जहां यहां कुल 2,27,649 मतदाता थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 2,20,410 रह गई है। यानी मतदाता सूची से कुल 7,239 नाम कम हो गए हैं।
दतिया में मतदाताओं की यह कमी राजनीतिक नजरिए से भी चर्चा का विषय बन गई है। वजह यह है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने भाजपा के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों के अंतर से हराया था। अब SIR के बाद हटाए गए मतदाताओं की संख्या कांग्रेस की उस जीत के अंतर के लगभग बराबर पहुंच गई है।
इस बदलाव के बाद राजनीतिक दल मतदाता सूची का आकलन करने में जुट गए हैं। कांग्रेस जिला इकाई नई मतदाता सूची का पुराने आंकड़ों से मिलान कर रही है। पार्टी यह जांच कर रही है कि हटाए गए मतदाताओं में कितने नाम वास्तविक कारणों से हटाए गए हैं और कहीं किसी प्रकार की गड़बड़ी तो नहीं हुई है।
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की वजह पूर्व विधायक के पद खाली होने के कारण बनी है। चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रत्याशी घर-घर संपर्क कर मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, नई मतदाता सूची चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता संख्या में बदलाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि केवल मतदाताओं की संख्या घटने से चुनाव परिणाम का अनुमान लगाना संभव नहीं है, क्योंकि जीत-हार कई अन्य मुद्दों और मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करती है।
दतिया उपचुनाव में इस बार मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस जहां अपनी पिछली जीत को बरकरार रखने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा इस सीट को वापस अपने कब्जे में लेने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। SIR के बाद बदली मतदाता सूची और उसमें आए बदलाव चुनावी चर्चा का प्रमुख मुद्दा बने हुए हैं।
अब सभी की नजर 16 जुलाई को होने वाली नाम वापसी प्रक्रिया पर है। इसके बाद चुनावी मैदान में मौजूद उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होगी और दतिया में उपचुनाव की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।