Vidisha विदिशा (मध्य प्रदेश): बच्चों से जुड़े यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री (CSAM) को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इंस्टाग्राम और Meta के अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री मिलने की शिकायतों के बाद छह राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्रियंक कानूनगो ने बताया कि आयोग ने पुलिस से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है जो बच्चों का यौन शोषण करते हैं, इस तरह की घटनाओं का वीडियो बनाते हैं और फिर उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तीन अलग-अलग तरह के गंभीर अपराध हैं और प्रत्येक मामले में कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। यदि ऐसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री उपलब्ध है, तो संबंधित कंपनियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आयोग ने पुलिस से ऐसे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
NHRC का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। आयोग ने संबंधित राज्यों की पुलिस से जांच तेज करने और इस तरह के अपराधों में शामिल लोगों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने को कहा है।
आयोग ने यह भी संकेत दिया कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी, ताकि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को समय रहते हटाया जा सके और ऐसे मामलों की सूचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दी जा सके। NHRC ने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जानी चाहिए।