भोपाल में छात्राओं के बीच पहुंचे CM मोहन यादव, AI और करियर पर साझा किए अपने अनुभव
भोपाल : कमला नेहरू सांदीपनि कन्या शासकीय विद्यालय में आयोजित ‘किताब से कल तक’ कार्यक्रम उस समय यादगार बन गया, जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्राओं के साथ खुलकर संवाद किया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक शैक्षणिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसमें शिक्षा, तकनीक, नेतृत्व, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रेरणादायक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए छात्राओं को आधुनिक तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने, तनावमुक्त जीवन जीने और समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं एक सरकारी स्कूल के छात्र रहे हैं। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि उनके समय में सरकारी स्कूलों में आज जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और मेहनत के बल पर आगे बढ़े। उन्होंने छात्राओं से कहा कि आज उन्हें बेहतर भवन, स्मार्ट क्लास, आधुनिक शिक्षण संसाधन और अनुकूल वातावरण मिला है, इसलिए उन्हें इन अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन को बदलने की सबसे बड़ी ताकत है और हर विद्यार्थी को इसका सही उपयोग करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को यह जानकारी मिली कि विद्यालय में छात्राओं की अपनी स्कूल कैबिनेट भी संचालित होती है। इस पर उन्होंने कैबिनेट के सभी सदस्यों को मंच पर बुलाकर परिचय लिया। हेड गर्ल, डिप्टी हेड गर्ल, स्पोर्ट्स, कल्चरल, डिसिप्लीन और अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहीं छात्राओं ने अपने कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल बच्चों में नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। उन्होंने कहा कि भविष्य के सफल नेतृत्व की शुरुआत स्कूल से ही होती है।
संवाद के दौरान छात्राओं ने मुख्यमंत्री से कई रोचक सवाल भी पूछे। एक छात्रा ने पूछा कि क्या वे ChatGPT और अन्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग करते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विभिन्न कार्यक्रमों और भाषणों की तैयारी के दौरान नई जानकारियां प्राप्त करने के लिए AI की सहायता लेते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI केवल एक सहायक माध्यम है, अंतिम निर्णय और समझ इंसान की अपनी होनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं को सलाह दी कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिली जानकारी को आंख बंद करके स्वीकार न करें, बल्कि तथ्यों का सत्यापन करें और अपनी तार्किक सोच का उपयोग करें।
एक अन्य छात्रा ने मानसिक तनाव से बचने के उपाय पूछे। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में तनाव एक सामान्य समस्या बन चुका है, लेकिन सही दिनचर्या अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं नियमित रूप से योग और व्यायाम करते हैं, संगीत सुनते हैं तथा पर्याप्त नींद लेने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और संतुलित जीवनशैली से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और मूल्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल आर्थिक विकास या तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना और ‘जियो और जीने दो’ जैसे सिद्धांतों से होती है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने विद्यालय के शिक्षकों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने शिक्षकों से खेती, सेना, विज्ञान, राजनीति, उद्यमिता, खेल और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग और मजबूत नैतिक मूल्य ही प्रदेश और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। ‘किताब से कल तक’ कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को न केवल प्रेरणा मिली, बल्कि शिक्षा, नेतृत्व, तकनीक और जीवन प्रबंधन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण संदेश भी प्राप्त हुए।