झाबुआ/लखनऊ। फर्जी IPO, शेयर बाजार और साइबर फ्रॉड से जुड़े एक बड़े कथित नेटवर्क की जांच में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान रूपगढ़ गांव निवासी विनोद गोपाल राठौर के रूप में बताई गई है। गिरफ्तारी के बाद उसे पेटलावद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लखनऊ ले जाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कार्रवाई देशभर में फैले कथित फर्जी IPO और स्टॉक मार्केट साइबर फ्रॉड सिंडिकेट की जांच के सिलसिले में की गई है। STF की जांच में राठौर का नाम कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े एक सहयोगी के रूप में सामने आया है। हालांकि, मामले में आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
2,934 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड से जुड़ा मामला
जांच का दायरा काफी बड़ा बताया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जिस कथित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट की जांच की जा रही है, उसमें करीब 2,934 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन और धोखाधड़ी का मामला शामिल है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए लोगों को फर्जी IPO, निवेश और शेयर बाजार से जुड़े आकर्षक ऑफर देकर निशाना बनाया जाता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस कथित सिंडिकेट को अनुराग श्रीवास्तव द्वारा संचालित किए जाने की बात सामने आई है। STF अब नेटवर्क से जुड़े लोगों, कंपनियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर निवेशकों से जुटाई गई रकम किन खातों में पहुंची और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
पिक्सलर कंपनी के मालिक पर सहयोगी होने का आरोप
STF की जांच में विनोद गोपाल राठौर को पिक्सलर कंपनी का मालिक बताया गया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि राठौर ने कथित तौर पर मुख्य आरोपी अनुराग श्रीवास्तव और उसके नेटवर्क के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क में रहकर कुछ गतिविधियों में सहयोग किया।
पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर STF को कथित तौर पर पता चला कि राठौर ने वर्ष 2022 में एक गेमिंग कंपनी शुरू करने में मदद की थी। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस कंपनी का इस्तेमाल सामान्य कारोबारी गतिविधियों के बजाय संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया।
हालांकि, यह आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं। अदालत में आरोप साबित होना बाकी है और आरोपी को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।
गेमिंग कंपनी के जरिए रकम छिपाने की आशंका
जांचकर्ताओं का मानना है कि कथित साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग कारोबारी गतिविधियों और कंपनियों के माध्यम से घुमाया जा सकता था। इसी कड़ी में गेमिंग कंपनी की भूमिका की जांच की जा रही है।
STF अब कंपनी की स्थापना से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों, लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारियों की पड़ताल कर सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कंपनी में पैसा कहां से आया, किन लोगों ने निवेश किया और कंपनी के खातों से किन लोगों या संस्थाओं को भुगतान किया गया।
साइबर फ्रॉड के मामलों में अक्सर फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल धन को अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ऐसे में जांच एजेंसियां आर्थिक लेन-देन की पूरी श्रृंखला तैयार करने पर जोर देती हैं।
पेटलावद कोर्ट में पेशी के बाद लखनऊ रवाना
राठौर की गिरफ्तारी के बाद उसे स्थानीय अदालत यानी पेटलावद कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे लखनऊ ले जाया गया, जहां STF उससे आगे पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसी कथित नेटवर्क में उसकी भूमिका, अन्य आरोपियों से उसके संबंध और कंपनियों के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी।
STF की कार्रवाई के बाद इस मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि नेटवर्क का संचालन किन शहरों और राज्यों से किया जा रहा था तथा इसके संपर्क में कितने लोग थे।
निवेशकों को फर्जी IPO के नाम पर निशाना बनाने का आरोप
इस मामले में जांच का एक प्रमुख पहलू कथित फर्जी IPO और शेयर बाजार निवेश से जुड़ा है। साइबर अपराधी अक्सर निवेशकों को कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया ग्रुप या निवेश योजनाओं से जोड़ते हैं। इसके बाद उनसे रकम जमा कराई जाती है और कई बार स्क्रीन पर फर्जी मुनाफा दिखाकर अतिरिक्त निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि मौजूदा मामले में भी इसी तरह की गतिविधियों के जरिए बड़े पैमाने पर धन जुटाया गया हो सकता है। 2,934 करोड़ रुपये की कथित राशि से जुड़े मामले को देखते हुए जांचकर्ताओं के सामने नेटवर्क की वित्तीय संरचना और लाभार्थियों की पहचान करना बड़ी चुनौती है।
आगे और खुलासे की उम्मीद
विनोद गोपाल राठौर की गिरफ्तारी को STF की जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अब पूछताछ के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर एजेंसी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं तक पहुंचने की कोशिश करेगी।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। राठौर पर लगाए गए आरोपों की न्यायिक जांच बाकी है और दोष सिद्ध होने तक वह कानून की नजर में आरोपी मात्र हैं। STF की आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गेमिंग कंपनी और फर्जी IPO नेटवर्क के बीच किस स्तर का संबंध था तथा 2,934 करोड़ रुपये के कथित साइबर फ्रॉड में आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या रही।