चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक तीर्थस्थल चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने इस बार ऐसा रौद्र रूप दिखाया है, जिसे देखकर स्थानीय लोग भी हैरान हैं। लगातार बारिश के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और देखते ही देखते रामघाट समेत नदी किनारे बसे कई इलाके जलमग्न हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब **90 साल में मंदाकिनी नदी में इतनी भयानक बाढ़ नहीं देखी गई।
मंदाकिनी नदी के उफान का सबसे ज्यादा असर रामघाट क्षेत्र में देखने को मिला है। यहां स्थित कई दुकानें, होटल, आश्रम, मंदिर और मठ पानी में डूब गए हैं। बाढ़ के कारण स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
रामघाट पर मचा हाहाकार
चित्रकूट का रामघाट धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर ने पूरे घाट क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।
घाट किनारे बनी कई दुकानें पानी में डूब गईं। पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदारों से लेकर छोटे व्यापारियों तक को भारी नुकसान हुआ है। कई जगह पानी दुकानों के अंदर तक पहुंच गया, जिससे सामान खराब हो गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कई लोगों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का मौका तक नहीं मिला।
आश्रम और मंदिर भी पानी से घिरे
मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित कई आश्रम और धार्मिक स्थल भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई जगहों पर पानी भरने के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है।
प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस और राहत टीमों को भी निगरानी के लिए लगाया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
बुजुर्गों ने बताया ऐतिहासिक बाढ़
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में मंदाकिनी नदी का ऐसा विकराल रूप पहले कभी नहीं देखा। 90 वर्षीय स्थानीय निवासी राम सलोने ने बताया कि उनकी याद में यह सबसे बड़ी बाढ़ है।
नदी के बढ़ते जलस्तर ने आसपास के कई गांवों और बस्तियों को प्रभावित किया है। कई घरों में पानी घुस गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
सड़कों पर चलने लगी नाव
बाढ़ की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं। कुछ स्थानों पर लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा।
कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने में जुटी हैं।
मध्य प्रदेश से भी जुड़ा असर
चित्रकूट के साथ मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर का असर दिखाई दिया है। भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं।
कुछ स्थानों पर बांध और नदी के बढ़ते दबाव के कारण भी स्थिति गंभीर हुई है। इससे सतना और चित्रकूट क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हुआ है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। राहत और बचाव टीमों को तैयार रखा गया है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
व्यापारियों को बड़ा नुकसान
रामघाट क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक पर्यटन से जुड़े कारोबार पर निर्भर हैं। बाढ़ के कारण दुकानों और छोटे व्यापारियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
दुकानदारों का कहना है कि त्योहारों और पर्यटन सीजन के दौरान बाढ़ आने से उनकी आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ेगा। अब वे सरकार से राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
आस्था के केंद्र पर प्राकृतिक संकट
चित्रकूट भगवान राम की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध है और मंदाकिनी नदी यहां धार्मिक महत्व रखती है। लेकिन इस बार नदी के उफान ने श्रद्धा के इस केंद्र को प्राकृतिक संकट में डाल दिया है।
बाढ़ की तस्वीरों ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।