भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। उनके निर्वाचन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुशी जताते हुए उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इसे भारतीय जनता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। राज्यसभा की इस सीट के लिए पुरी भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार थे। दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज होने के बाद वह चुनाव मैदान में अकेले रह गए थे। इसके चलते नाम वापसी की निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने उनके निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी।मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के निर्विरोध निर्वाचन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विश्वास जताया कि पुरी के लंबे प्रशासनिक अनुभव, राजनीतिक समझ और केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का लाभ मध्य प्रदेश को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा में उनके प्रतिनिधित्व से प्रदेश के विकास से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से भी हरदीप सिंह पुरी को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश संगठन और वरिष्ठ नेताओं ने भी पुरी के निर्वाचन का स्वागत किया। पार्टी नेताओं का मानना है कि एक अनुभवी केंद्रीय मंत्री का मध्य प्रदेश से राज्यसभा में पहुंचना प्रदेश और केंद्र के बीच समन्वय को और मजबूत कर सकता है।हरदीप सिंह पुरी ने 31 अक्टूबर 2026 को भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर में राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राज्य सरकार के कई मंत्री एवं वरिष्ठ पार्टी नेता मौजूद रहे थे।
नामांकन के दौरान भाजपा नेताओं ने पुरी की उम्मीदवारी का समर्थन किया था। पार्टी ने उनके अनुभव और केंद्र सरकार में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया था। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया के दौरान अन्य उम्मीदवारों ने भी नामांकन दाखिल किए थे, जिससे शुरुआत में मुकाबले की संभावना बनी हुई थी।राज्यसभा उपचुनाव में हरदीप सिंह पुरी के अतिरिक्त दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। इनमें कांटे सायन्ना और राजकुमार लोहानी शामिल थे। निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन पत्रों की जांच के बाद दोनों उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए। राजकुमार लोहानी का नामांकन निर्धारित समय-सीमा तक अनिवार्य फॉर्म-26 शपथपत्र जमा नहीं करने के कारण खारिज हुआ।नामांकन पत्रों की जांच के बाद हरदीप सिंह पुरी एकमात्र वैध उम्मीदवार रह गए। इसके बाद 5 नवंबर को नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा समाप्त होने पर उनके निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया। निर्वाचन अधिकारी ने औपचारिक घोषणा करते हुए निर्वाचन प्रमाणपत्र जारी किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी विधायकों के साथ प्रमाणपत्र प्राप्त किया।गौरतलब है कि हरदीप सिंह पुरी वर्तमान में केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह लंबे समय तक भारतीय विदेश सेवा में भी कार्य कर चुके हैं। उन्हें कूटनीति, प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का व्यापक अनुभव है। केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र, पेट्रोलियम आपूर्ति और प्राकृतिक गैस से संबंधित नीतिगत विषयों पर काम किया है।
हरदीप सिंह पुरी इससे पहले उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे हैं। उनका वर्तमान कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। ऐसे में मध्य प्रदेश से उनका निर्वाचन संसद के उच्च सदन में उनकी सदस्यता जारी रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाकर एक अनुभवी केंद्रीय मंत्री को राज्यसभा में बनाए रखने की रणनीति अपनाई है।राजनीतिक दृष्टि से भी इस निर्वाचन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है और विधानसभा में पार्टी के पास मजबूत बहुमत है। ऐसे में राज्यसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार की स्थिति पहले से मजबूत मानी जा रही थी। हालांकि, निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति अन्य दोनों उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद बनी।इस चुनाव प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन को लेकर आपत्तियां भी उठाई थीं। विपक्ष की ओर से उनके नामांकन संबंधी दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी ने आपत्तियों पर विचार करने के बाद पुरी का
नामांकन वैध पाया। इसके बाद आगे की चुनावी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की गई।मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार के लिए भी यह निर्वाचन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद प्रदेश से जुड़े ऊर्जा, औद्योगिक विकास और निवेश जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।मध्य प्रदेश औद्योगिक निवेश, ऊर्जा उत्पादन और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। ऐसे में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ नेता का प्रदेश से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करना राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से उपयोगी हो सकता है। हालांकि, राज्य को मिलने वाले किसी विशेष लाभ या परियोजना का निर्धारण संबंधित सरकारी नीतियों और स्वीकृतियों पर ही निर्भर करेगा।भाजपा नेताओं ने हरदीप सिंह पुरी के निर्विरोध निर्वाचन को पार्टी संगठन के लिए खुशी का अवसर बताया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित कई नेताओं ने उन्हें सफल संसदीय कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दी हैं।हरदीप सिंह पुरी का मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचन भाजपा की संसदीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अब प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि इस बात पर रहेगी कि पुरी राज्यसभा में मध्य प्रदेश से जुड़े मुद्दों को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं और उनके अनुभव का प्रदेश के विकास में कितना योगदान मिलता है।
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