ग्वालियर : मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग कथित तौर पर असम के रास्ते भारत में दाखिल हुए थे और बाद में फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपनी पहचान छिपाते हुए ग्वालियर के अलग-अलग इलाकों में रह रहे थे। पुलिस ने सभी संदिग्धों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया है। अब उनके दस्तावेजों की सत्यता, आपराधिक रिकॉर्ड और भारत में प्रवेश से जुड़े तथ्यों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई पहले पकड़े गए कुछ संदिग्ध व्यक्तियों से मिली महत्वपूर्ण जानकारी के आधार पर की गई। पूछताछ के दौरान ऐसे इनपुट मिले थे कि ग्वालियर में कुछ और लोग भी अवैध रूप से रह रहे हैं। इसके बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया और शहर के विभिन्न इलाकों में दबिश देकर संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। कार्रवाई के दौरान उनके पास मौजूद दस्तावेजों की भी जांच की गई, जिनमें कई कागजात संदिग्ध पाए गए।
प्रारंभिक पूछताछ में हिरासत में लिए गए लोगों ने दावा किया कि वे असम के रास्ते भारत में प्रवेश किए थे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग माध्यमों से पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराए और ग्वालियर में रहना शुरू कर दिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उन्होंने भारत में प्रवेश कब और किन परिस्थितियों में किया, किन लोगों ने उन्हें शरण दी और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में किस नेटवर्क ने उनकी मदद की। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि दस्तावेजों के पीछे किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल सभी संदिग्धों को डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जहां उनकी पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों से भी संपर्क कर यह जानकारी जुटाई जा रही है कि कहीं इन लोगों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज तो नहीं है। यदि किसी प्रकार की आपराधिक गतिविधि या सुरक्षा संबंधी जानकारी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू फर्जी दस्तावेजों का भी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आधार कार्ड, पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज किस प्रकार तैयार किए गए और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। यदि दस्तावेज बनाने वाले किसी गिरोह या एजेंट की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी पहचान बनाकर देश के किसी भी हिस्से में रहना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
पुलिस ने विभिन्न राज्यों की एजेंसियों को पत्र भेजकर हिरासत में लिए गए लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि वे केवल अवैध रूप से रह रहे थे या किसी अन्य आपराधिक गतिविधि से भी जुड़े थे। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में उनके खिलाफ कोई अन्य मामला नहीं मिलता है, तब भी विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और यह पता लगाने में जुटी है कि ग्वालियर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी कहीं इसी तरह के मामले तो नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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