रतलाम: रेलवे में नौकरी पाने की चाह में फर्जी अभ्यर्थियों के जरिए शारीरिक दक्षता परीक्षा पास कराने का खेल लगातार सामने आ रहा है। मध्य प्रदेश के रतलाम में रेलवे ग्रुप-D और लेवल-1 पदों के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में एक के बाद एक डमी अभ्यर्थी पकड़े जाने से भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामले में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के तीन युवकों को कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह दौड़ लगाने के आरोप में पकड़ा गया है। इससे कुछ दिन पहले बिहार का एक युवक भी इसी तरह दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंचा था।
जानकारी के मुताबिक रतलाम रेलवे ग्राउंड पर रेलवे ग्रुप-D और लेवल-1 की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही थी। परीक्षा के अंतिम दिन अधिकारियों की जांच के दौरान तीन युवकों पर संदेह हुआ। पहचान और दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ी तो मामला कथित फर्जी अभ्यर्थियों से जुड़ा निकला। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक तीनों युवक उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के रहने वाले हैं और उन पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह दौड़ परीक्षा में शामिल होने का आरोप है। मामले में एक मूल अभ्यर्थी मनीष की तलाश की जा रही है।
2 सितंबर को भी सामने आया था खेल
इस मामले ने इसलिए ज्यादा चिंता बढ़ाई है क्योंकि इसी परीक्षा के दौरान कुछ दिन पहले भी डमी अभ्यर्थी का मामला सामने आ चुका था। जांच में सामने आया कि बिहार के मुंगेर जिले का रहने वाला 26 वर्षीय अजीत कुमार कुशवाह कथित तौर पर दूसरे उम्मीदवारों की जगह शारीरिक दक्षता परीक्षा देने आया था।
पूछताछ में अजीत ने बताया कि उसने 2 सितंबर को मुंगेर के ही निरंजन कुमार की जगह रेलवे ग्राउंड में दौड़ लगाई थी। हालांकि वह उस प्रयास में शारीरिक दक्षता परीक्षा पास नहीं कर पाया। इसके बाद वह दोबारा दूसरे अभ्यर्थी कुंदन कुमार की जगह परीक्षा देने पहुंचा। इस बार उसकी पहचान अधिकारियों की जांच में सामने आ गई और उसे पकड़ लिया गया। इस प्रकरण में सामने आई जानकारी के अनुसार निरंजन की जगह दौड़ लगाने के लिए करीब 30 हजार रुपये में सौदा हुआ था। आरोप है कि 10 हजार रुपये पहले दिए गए थे और बाकी रकम परीक्षा के बाद दी जानी थी। पहली कोशिश में अजीत दौड़ में सफल नहीं हुआ। बाद में वह दूसरे अभ्यर्थी की जगह फिर परीक्षा देने पहुंचा और पकड़ा गया।
पहचान जांच से कैसे निकल गया डमी?
पूरे प्रकरण का सबसे अहम सवाल यह है कि जब 2 सितंबर को डमी अभ्यर्थी दूसरे उम्मीदवार की जगह दौड़ में शामिल हुआ था तो वह शुरुआती पहचान जांच से कैसे गुजर गया। रेलवे भर्ती जैसी प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेज और बायोमेट्रिक जैसी जांच की व्यवस्था रहती है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जांच में बायोमेट्रिक और रेटिना सत्यापन से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं और रेलवे से संबंधित दस्तावेज तथा परीक्षा के वीडियो फुटेज जुटाए जा रहे हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी उम्मीदवार पहली बार जांच से कैसे निकल गया और क्या किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई थी।
निरंजन गिरफ्तार, कुंदन की तलाश
अजीत से पूछताछ के बाद मामले की कड़ियां खुलती चली गईं। पुलिस ने उस अभ्यर्थी निरंजन कुमार को भी गिरफ्तार किया, जिसकी जगह अजीत ने 2 सितंबर को दौड़ लगाई थी। वहीं दूसरे अभ्यर्थी कुंदन कुमार की तलाश जारी बताई गई। रिपोर्ट के अनुसार कुंदन स्वयं परीक्षा देने के लिए रतलाम नहीं आया था। अब इसके ठीक बाद दूसरे अभ्यर्थियों की जगह दौड़ने पहुंचे तीन और युवकों के पकड़े जाने से मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि ये अलग-अलग घटनाएं हैं या इनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।
क्या डमी उम्मीदवारों का बड़ा नेटवर्क है?
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद जांच का दायरा केवल पकड़े गए युवकों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल यह है कि उम्मीदवारों और डमी अभ्यर्थियों के बीच संपर्क कौन करा रहा था। क्या पैसे लेकर शारीरिक परीक्षा पास कराने वाला कोई गिरोह सक्रिय है या उम्मीदवार अपने स्तर पर परिचित युवकों की मदद ले रहे थे? रतलाम का मामला अकेला भी नहीं है। नागपुर में मध्य रेलवे की ग्रुप-D शारीरिक पात्रता परीक्षा में भी दूसरे उम्मीदवारों के नाम पर परीक्षा देने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहां कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल
रेलवे की नौकरियों के लिए बड़ी संख्या में युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि कोई उम्मीदवार पैसे देकर किसी अधिक फिट व्यक्ति को अपनी जगह शारीरिक परीक्षा में भेजता है तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होती है। योग्य उम्मीदवारों के लिए यह सीधा नुकसान भी हो सकता है। रतलाम में कुछ ही दिनों के अंतराल में सामने आए मामलों ने यह भी संकेत दिया है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान पहचान सत्यापन को और मजबूत करने की जरूरत हो सकती है। खासकर उस स्थिति में जब कोई व्यक्ति एक उम्मीदवार के नाम पर परीक्षा देकर निकल जाए और कुछ दिन बाद दूसरे उम्मीदवार की जगह फिर पहुंच जाए।
जांच में खुल सकती हैं और परतें
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और अन्य संदिग्ध उम्मीदवारों की तलाश जारी है। जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना होगा कि डमी उम्मीदवारों को कितनी रकम दी गई, उनके दस्तावेज किसने तैयार किए और असली उम्मीदवारों से उनका संपर्क किस माध्यम से हुआ। लगातार पकड़े जा रहे मामलों से साफ है कि रेलवे भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थियों के इस्तेमाल की कोशिशों को गंभीरता से जांचने की जरूरत है। 2 सितंबर को दूसरे की जगह दौड़ लगाने का मामला सामने आने के बाद कुछ ही दिनों में और उम्मीदवार पकड़े जाने से आशंका गहरी हुई है कि कहानी केवल एक-दो अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं हो सकती। अब जांच से ही साफ होगा कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है या अलग-अलग उम्मीदवारों ने व्यक्तिगत स्तर पर यह रास्ता अपनाया।
Tags: