CBI's की दलील के बाद कोर्ट का फैसला, ट्विशा शर्मा मामले में दोनों आरोपियों की हिरासत बढ़ी

Update: 2026-07-14 13:12 GMT

Bhopal भोपाल :  ट्विशा शर्मा मौत मामले में भोपाल की अदालत ने मंगलवार को पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी है। यह फैसला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की उस दलील के बाद आया, जिसमें एजेंसी ने बताया कि दोनों आरोपियों ने आवाज के नमूने (वॉयस सैंपल) लेने की प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया।

कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। सीबीआई ने अदालत से दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए बताया कि 6 जुलाई को वॉयस सैंपल लेने की प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने सहयोग नहीं किया था।

ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने बताया कि समर्थ सिंह ने वॉयस सैंपल देने से इनकार कर दिया, जबकि गिरिबाला सिंह ने शुरुआत में एक नमूना दिया था, लेकिन बाद में प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से मना कर दिया।

अधिवक्ता अंकुर पांडे ने सुनवाई के बाद बताया कि सीबीआई ने अदालत को आरोपियों के असहयोग की जानकारी दी और हिरासत बढ़ाने की मांग की। एजेंसी की दलीलों को स्वीकार करते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी।

सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार की ओर से दायर उस आवेदन पर भी चर्चा हुई, जिसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। परिवार के वकीलों के अनुसार, एम्स भोपाल ने अदालत को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेज पहले ही सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंपे जा चुके हैं, इसलिए उन्हें अलग से उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

वहीं, एम्स दिल्ली की ओर से इसी तरह की मांग पर अभी कोई जवाब नहीं दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, एम्स दिल्ली के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंप दी है। हालांकि रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकाले गए हैं, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच में इस रिपोर्ट को अहम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को सीबीआई हिरासत पूरी होने के बाद 2 जून से भोपाल सेंट्रल जेल में रखा गया है। ट्विशा शर्मा 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं।

मामले में ससुराल पक्ष की ओर से इसे आत्महत्या बताया गया था, जबकि मायके वालों ने हत्या का आरोप लगाया था। परिवार ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के प्रभाव का हवाला देते हुए पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया था।

बाद में हाईकोर्ट ने 25 मई को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। फिलहाल सीबीआई फोरेंसिक साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर रही है। चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा नजदीक आने के कारण जांच अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। माना जा रहा है कि एजेंसी जल्द ही जांच की प्रगति और निष्कर्ष अदालत के सामने पेश कर सकती है।

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