उज्जैन। पवित्र सावन मास के दूसरे सोमवार और प्रदोष पर्व के विशेष संयोग पर धर्मनगरी उज्जैन में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। बाबा महाकाल आज भक्तों को दूल्हे के दिव्य और मनोहारी स्वरूप में दर्शन दे रहे हैं। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।

श्रावण सोमवार का धार्मिक महत्व वैसे ही विशेष माना जाता है, लेकिन इस बार सावन के दूसरे सोमवार के साथ प्रदोष पर्व का भी संयोग बना है। सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष को सोम प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव की आराधना के लिए इस संयोग को विशेष फलदायी माना जाता है। इसी कारण उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

तड़के 2:30 बजे खुले मंदिर के पट

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और विशेष धार्मिक आयोजन को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट तड़के करीब 2:30 बजे ही खोल दिए गए। पट खुलते ही श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बन गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही दर्शन के लिए कतारों में जुटने लगे थे।

मंदिर परिसर में सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं की गईं। भस्म आरती और विशेष पूजन के लिए भी भक्तों में खासा उत्साह रहा। बाबा महाकाल के अलौकिक श्रृंगार के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु घंटों इंतजार करते नजर आए।

दूल्हे के दिव्य स्वरूप में बाबा महाकाल

सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान शिव को दूल्हे के स्वरूप में सजाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। बाबा महाकाल के इस विशेष स्वरूप के दर्शन को भक्तों ने अपने लिए सौभाग्य का अवसर बताया।

श्रद्धालुओं के लिए बाबा का यह श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे भक्तों के बीच बाबा महाकाल के दूल्हा स्वरूप की चर्चा रही। श्रद्धालु भगवान शिव से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते नजर आए।

सोम प्रदोष के संयोग से बढ़ा धार्मिक महत्व

इस वर्ष सावन के दूसरे सोमवार के दिन प्रदोष तिथि का भी संयोग बना है। यही वजह है कि इस दिन को शिवभक्तों के लिए विशेष माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन है, जबकि प्रदोष व्रत भी भगवान शिव की आराधना से जुड़ा पर्व है। दोनों का एक साथ आना भक्तों के लिए विशेष अवसर माना जाता है।

श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत, पूजन, जलाभिषेक और भगवान महाकाल के दर्शन कर रहे हैं। उज्जैन में इस विशेष अवसर को लेकर सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां तेज हैं।

‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के उत्साह का अंदाजा मंदिर परिसर में लगातार गूंज रहे जयकारों से लगाया जा सकता है। भक्त ‘जय श्री महाकाल’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से उज्जैन पहुंचे हैं। उनके लिए बाबा महाकाल के दर्शन सावन के इस पावन अवसर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

महाकाल की सवारी को लेकर भी उत्साह

सावन के सोमवार पर उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। श्रावण-भादो के दौरान भगवान महाकाल की सवारी की परंपरा रही है। दूसरे सोमवार पर भी श्रद्धालुओं में सवारी को लेकर विशेष उत्साह है। मंदिर से निकलने वाली इस धार्मिक यात्रा के दौरान बाबा महाकाल के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मार्ग के दोनों ओर जुटते हैं।

सवारी के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी माहौल को भक्तिमय बनाती हैं। उज्जैन की सड़कों पर बाबा महाकाल के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है।

प्रशासन ने की विशेष व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने, भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण मंदिर क्षेत्र में लगातार भीड़ बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए जाएं और किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

भक्ति में डूबी महाकाल की नगरी

सावन के दूसरे सोमवार और सोम प्रदोष के संयोग ने उज्जैन की धार्मिक आभा को और बढ़ा दिया है। एक ओर मंदिर में बाबा महाकाल दूल्हे के दिव्य स्वरूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, तो दूसरी ओर हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए उत्साह के साथ कतारों में खड़े हैं।

तड़के 2:30 बजे मंदिर के पट खुलने से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। मंदिर परिसर में गूंजते जयकारे, भक्तों की आस्था और बाबा महाकाल के मनोहारी श्रृंगार ने उज्जैन को पूरी तरह शिवमय कर दिया है।

सावन के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा महाकाल के दर्शन और पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यही आस्था हजारों भक्तों को उज्जैन खींच लाई है। फिलहाल महाकाल की नगरी में हर ओर भक्ति का रंग नजर आ रहा है और पूरा शहर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज रहा है।

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