पमरे का केन्द्रीय रेल चिकित्सालय जो गरीब यात्रियों और मरीज़ों के लिए उपयोगी साबित हो रहा
पश्चिम मध्य रेलवे का केन्द्रीय रेल चिकित्सालय की सन 1930 की तस्वीर www.ssplprints की है
जबलपुर। ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे ने यह अस्पताल अपने श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए उपलब्ध कराया था। स्वास्थ्य और सुरक्षा के उपाय उतने कड़े नहीं थे जितने आज हैं। सुरक्षात्मक कपड़े नहीं पहने गए थे और मशीनों में कम सुरक्षा विशेषताएं थीं। दुर्घटनाएं आम थीं और अस्पताल के कर्मचारियों ने टूटे हुए अंगों, फंसी हुई उंगलियों और यहां तक कि विच्छेदन का भी इलाज किया।
वर्तमान समय में इस अस्पताल में लगा है आक्सीजन गैस
पश्चिम मध्य रेल के केंद्रीय चिकित्सालय सन 1930 से शुरू हुआ था और आज साल 2022 में ये अस्पताल लोगों के लिए जीवन दायिनी अस्पताल बन गया है। रेलवे के कर्मचारियों और मरीज़ों के लिए अस्पताल एक बहुत बड़ी सौगात बन गया है।
कोरोना काल में इस अस्पताल में 600 लीटर प्रति मिनट (36 M3/hr), भोपाल में 500 लीटर प्रति मिनट ( 30 M3/hr) एवं कोटा में भी 500 लीटर प्रति मिनट (30 M3/hr) का आक्सीजन प्लांट शुरू हो गया था। ये सभी आक्सीजन प्लांट PSA (Pressure Swing Adsorption) मेडिकल आक्सीजन गैस की पद्धति से कार्य करते हैं।
जिसमें तीन मुख्य यूनिट होंगे जैसे रेफ्रिजरेटर एयर ड्राइंग यूनिट को लगाना, ट्वीन टावर पीएसए मोड्यूएल को स्थापित करना एवं आक्सीजन स्टोरेज टैंक बनाना। रेलवे चिकित्सालयों में आक्सीजन प्लांट लगाने से कोविड संक्रमण के मरीजों को समय रहते आक्सीजन की आपूर्ति की जा सकेगी।
इससे रेलवे चिकित्सालय में मेडिकल सुविधाओं का विस्तार होगा। मौजूदा हालात को देखते हुए रेलवे ने अस्पतालों आक्सीजन प्लांट लगाने का जिम्मा हर मंडल के डीआरएम को सौंपा है। पमरे के रेलवे चिकित्सालयों में सुविधाओं की वृद्धि से चिकित्सा आपात स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे की शुरुआत करने में मदद मिलेगी।