Madhya प्रदेश में बढ़े लापता लड़कियों के मामले, विधानसभा में आंकड़े पेश

Update: 2026-07-22 12:47 GMT

Bhopal भोपाल :   मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को प्रदेश में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर आंकड़ा सामने आया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में कुल 61,112 लड़कियां लापता हुईं। इनमें से 3,241 लड़कियां अभी भी लापता हैं।

मुख्यमंत्री द्वारा सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, लापता लड़कियों से जुड़े मामलों में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार की ओर से पेश किए गए सालाना आंकड़ों में बताया गया कि वर्ष 2021 में प्रदेश में 9,407 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद वर्ष 2022 में 9,093, वर्ष 2023 में 11,250, वर्ष 2024 में 11,907 और वर्ष 2025 में सबसे अधिक 13,146 मामले सामने आए।

इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले पांच वर्षों में लड़कियों के लापता होने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 की तुलना में 2025 में मामलों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है, जिसे लेकर चिंता जताई जा रही है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों की ओर से भी महिला सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाबदेही और प्रभावी कदम उठाने की मांग की जा सकती है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, लापता नाबालिग लड़कियों से जुड़े सभी मामलों को अपहरण की धाराओं के तहत दर्ज किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए तेजी से जांच करे और पीड़िताओं की तलाश के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

सरकार का कहना है कि लापता मामलों में पुलिस विभाग को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं और जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए जाते हैं।

विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में लड़कियों की बरामदगी भी की गई है, लेकिन हजारों मामलों में अब भी तलाश जारी है। 3,241 लड़कियों का अब तक पता नहीं चल पाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।

महिला सुरक्षा और लापता लड़कियों के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश में समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस जांच के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, साइबर निगरानी और मानव तस्करी जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

सरकार की ओर से दावा किया गया है कि कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, विधानसभा में सामने आए ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि लड़कियों की सुरक्षा को लेकर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं और इन पर प्रभावी तरीके से काम करने की जरूरत है।

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