इंजीनियरिंग का कमाल, MP को मिली बड़ी सौगात, भारत की सबसे लंबी जल सुरंग तैयार
भोपाल। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक ऐतिहासिक जल परियोजना का बड़ा काम पूरा हो गया है। नर्मदा नदी के पानी को सोन बेसिन तक पहुंचाने के लिए बनाई जा रही करीब 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत वाटर टनल अब तैयार हो चुकी है। इस सुरंग को भारत की सबसे लंबी वाटर टनल बताया जा रहा है। इसे तैयार करने में करीब 15 साल की मेहनत और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में विंध्य पर्वत श्रृंखला के बीच से होकर गुजरने वाली इस भूमिगत सुरंग का निर्माण नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की निगरानी में किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य नर्मदा नदी के जल को सोन बेसिन क्षेत्र तक पहुंचाना है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को सिंचाई और जल आपूर्ति का लाभ मिल सकेगा।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अनुसार, 14 जुलाई को सुरंग निर्माण में लगी टनल बोरिंग मशीन (TBM) सीमेंटेड कुएं तक पहुंच गई। इसके साथ ही सुरंग निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया। अब केवल मशीनों को बाहर निकालने और आगे की तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने का काम बाकी है।
अधिकारियों के मुताबिक, टनल बोरिंग मशीन को कुएं से बाहर निकालने में करीब डेढ़ महीने का समय लग सकता है। इसके बाद नहर प्रणाली के माध्यम से पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस परियोजना के पूरा होने से नर्मदा के जल का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
इस विशाल परियोजना की लागत करीब 1500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सुरंग का निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया गया है, क्योंकि इसे पहाड़ी इलाके के अंदर से बनाया गया है। इंजीनियरों को जमीन की बनावट, चट्टानों और भूगर्भीय परिस्थितियों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
स्लीमनाबाद की यह वाटर टनल मध्य प्रदेश की जल प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। भूमिगत सुरंग होने के कारण पानी के प्रवाह को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा और भूमि अधिग्रहण जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद नर्मदा नदी का पानी सोन बेसिन तक पहुंच सकेगा। इससे आसपास के क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी और जल संकट वाले क्षेत्रों को राहत मिल सकती है।
इस परियोजना को पूरा करने में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। टनल बोरिंग मशीन के जरिए जमीन के अंदर लंबी सुरंग तैयार की गई। यह तकनीक बड़े स्तर के भूमिगत निर्माण कार्यों में उपयोग की जाती है और इससे निर्माण कार्य को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाता है।
मध्य प्रदेश सरकार और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण इस परियोजना को राज्य के जल संसाधन विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू होने के बाद इसका सीधा फायदा किसानों और आम लोगों को मिलेगा।
करीब डेढ़ दशक की लंबी प्रक्रिया के बाद तैयार हुई यह वाटर टनल देश के बड़े जल प्रबंधन प्रोजेक्ट्स में शामिल हो गई है। यह परियोजना न केवल इंजीनियरिंग क्षमता का उदाहरण है, बल्कि भविष्य में जल संरक्षण और बेहतर वितरण व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
अब मशीनों को बाहर निकालने और अंतिम चरण के कार्य पूरे होने के बाद नर्मदा जल को सोन बेसिन तक पहुंचाने का रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा। इससे मध्य प्रदेश के जल संसाधन क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद है।