उज्जैन। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को विशेष धार्मिक परंपरा निभाई गई। भगवान महाकाल को सबसे पहले राखी अर्पित करने की परंपरा के तहत इस बार भी बाबा महाकाल की कलाई पर विशेष रूप से तैयार की गई आकर्षक राखी बांधी गई।

महाकाल मंदिर के पुजारी परिवारों की महिलाओं ने करीब एक सप्ताह की मेहनत से भगवान महाकाल के लिए दो फीट लंबी विशेष राखी तैयार की थी। इस दौरान महिलाओं ने सावन महीने में व्रत रखा और पूरी श्रद्धा के साथ राखी का निर्माण किया।

भस्म आरती के दौरान बांधी गई राखी

रक्षाबंधन के दिन शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे पुजारी परिवार की महिलाएं मंदिर पहुंचीं। भस्म आरती की विशेष पूजा के दौरान भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित करने के बाद उन्हें यह विशेष राखी बांधी गई।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, उज्जैन में रक्षाबंधन पर सबसे पहले भगवान महाकाल को राखी बांधने की परंपरा है। इसके बाद ही अन्य धार्मिक और पारिवारिक परंपराएं निभाई जाती हैं।

महाकाल मंदिर में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई और भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

रेशमी धागों और धार्मिक प्रतीकों से तैयार हुई राखी

पुजारी आकाश गुरु ने बताया कि भगवान महाकाल के लिए बनाई गई राखी बेहद खास थी। इसे रेशमी कपड़े, रेशमी धागों और कई सजावटी वस्तुओं से तैयार किया गया।

राखी को आकर्षक बनाने के लिए इसमें कांच का काम, रुद्राक्ष के दाने और मोर के पंख लगाए गए थे। इसके अलावा राखी पर भगवान महाकाल से जुड़े पवित्र प्रतीक भी बनाए गए थे।

इसमें त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड्र जैसे धार्मिक चिह्न शामिल थे, जो भगवान शिव की आस्था और स्वरूप को दर्शाते हैं।

राखी बनाते समय किया गया मंत्र जाप

पुजारी परिवार की महिलाओं ने बताया कि राखी तैयार करने के दौरान उन्होंने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ काम किया।

राखी बनाने के समय महिलाएं लगातार “जय महाकाल” और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करती रहीं।

उनका कहना है कि बाबा महाकाल के लिए राखी बनाना उनके लिए केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति और आस्था का विशेष अवसर है।

भगवान गणेश को भी अर्पित की गई राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल के साथ भगवान गणेश को भी विशेष राखी अर्पित की गई।

मंदिर में भगवान के विशेष श्रृंगार और पूजा के साथ पर्व का आयोजन किया गया। भक्तों ने भगवान शिव और गणेश जी से परिवार की सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना की।

सावन में शुरू हुई थी तैयारी

पुजारी परिवार की महिलाओं ने बताया कि इस विशेष राखी को तैयार करने का काम कई दिन पहले शुरू कर दिया गया था।

सावन महीने में ही इसकी तैयारी शुरू हुई थी। महिलाओं ने धार्मिक नियमों का पालन करते हुए राखी बनाई।

उनका कहना है कि बाबा महाकाल के लिए राखी तैयार करना उनके लिए सौभाग्य की बात है और हर वर्ष इस परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।

मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

रक्षाबंधन के अवसर पर महाकाल मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की खुशहाली और सुरक्षा की प्रार्थना की।

मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान को राखी अर्पित कर अपनी आस्था व्यक्त की।

धार्मिक परंपरा का महत्व

उज्जैन में भगवान महाकाल को राखी बांधने की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है।

भक्तों की मान्यता है कि भगवान महाकाल स्वयं अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। इसी भावना के साथ रक्षाबंधन पर बाबा को राखी अर्पित की जाती है।

इस विशेष आयोजन में धार्मिक आस्था, परंपरा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।

महाकाल मंदिर में निभाई गई यह परंपरा एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी और रक्षाबंधन पर्व को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

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