Raisen, रायसेन। शहर के वार्ड 3 मढ़ईपुरा में कुशवाह परिवार द्वारा संगीतमय 7 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का रविवार को समापन हो गया। शहर के सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक पंडित दुर्गा प्रसाद शर्मा के श्रीमुख से कथा सुनने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे। रविवार को अंतिम दिन की भागवत कथा में सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग सुनकर भक्त भावविभोर हो गए। दुर्गा महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का समापन करते हुए कई कथाओं का भक्तों को श्रवण करवाया।,जिसमें प्रभु श्री कृष्ण के 16108 शादियों के प्रसंग के साथ, सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथाएं सुनाई। उन्होंने बताया जीव ब्रह्म का एक ही स्वरूप माना जाता है।


 


सुदामा के पास श्रीकृष्ण नाम का धन...
कथा व्यास पर विराजित पंडित दुर्गा प्रसाद शर्मा ने बताया कि सुदामा जी के पास कृष्ण नाम का धन था। संसार की दृष्टि में गरीब तो थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। अपने जीवन में किसी से कुछ मांगा नहीं। लेकिन पत्नी सुशीला के बार-बार कहने पर सुदामा अपने बाल मित्र श्री कृष्ण से मिलने द्वारकानगरी गए। भगवान के पास जाकर भी कुछ नहीं मांगा। भगवान योगेश्वर अपने स्तर से सब कुछ दे देते हैं। सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की।
भागवत पुराण को जीवन में उतारें....
कथा समापन के दौरान पंडित शर्मा ने भक्तों को भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही।जिससे सभी लोग सनातन हिंदू धर्म की ओर अग्रसर हो। साथ ही भक्तों को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है, तो वहीं इसे करवाने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं।
पंडित श्री शर्मा ने बताया कि राजा परीक्षित के चार स्थान जुआ अड्डा, मधुशाला, वेशशाला वासियों में निवास करने की इजाजत मिलने के बाद सत्यवादी राजा परीक्षित की मतिभ्रम हो गई। राजा परीक्षित श्रीमद्भागवत कथा को श्रवण कर मोक्ष प्राप्त किया था। कथा पंडाल में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हुई। कथा के पूर्व रविवार को सुबह हवन की पूर्णाहुति हुई। शाम को कथा समापन पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
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