राजगढ़। निवेश की रकम कुछ ही समय में दोगुनी करने का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का राजगढ़ पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ‘ऑपरेशन मनी ट्रैप’ चलाकर करीब 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई की और देश के 10 राज्यों में 30 हजार किलोमीटर तक आरोपियों का पीछा कर उन्हें गिरफ्तार किया।

इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने कुल 14 आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों के कब्जे से 1.73 करोड़ रुपये नकद, चार लग्जरी वाहन और 19 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, जब्त की गई कुल संपत्ति की कीमत करीब 2 करोड़ 92 लाख 91 हजार रुपये है।

ब्यावरा के कारोबारी से हुई थी शुरुआत

राजगढ़ पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने पुलिस कंट्रोल रूम में पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 24 जुलाई को ब्यावरा निवासी 46 वर्षीय देवेंद्र पालीवाल ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में देवेंद्र पालीवाल ने बताया था कि प्रफुल्ल गजभिये नाम के व्यक्ति ने खुद को एक बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताया और निवेश करने पर रकम दोगुनी करने का लालच दिया।

आरोपी ने भरोसा दिलाया कि उसके माध्यम से निवेश करने पर कम समय में बड़ा फायदा मिलेगा। उसके झांसे में आकर पीड़ित ने बड़ी रकम निवेश कर दी, लेकिन बाद में उसे ठगी का एहसास हुआ।

शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगढ़ पुलिस ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि यह कोई सामान्य ठगी का मामला नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले एक संगठित गिरोह की करतूत है।

इसके बाद पुलिस ने विशेष अभियान ‘ऑपरेशन मनी ट्रैप’ शुरू किया। इस अभियान के तहत आरोपियों की गतिविधियों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और संपर्कों की जांच की गई।

10 राज्यों में चलाया गया अभियान

पुलिस ने आरोपियों की तलाश में देश के कई हिस्सों में दबिश दी। करीब 35 दिनों तक चली इस कार्रवाई में पुलिस टीमों ने 10 राज्यों में जाकर जांच की।

इस दौरान करीब 30 हजार किलोमीटर की यात्रा कर पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों का पता लगाया और एक-एक कर उन्हें गिरफ्तार किया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह के सदस्य लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे, जिससे उन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण था।

करोड़ों की संपत्ति जब्त

गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने बड़ी मात्रा में नकदी और अन्य सामान बरामद किया। इनमें 1.73 करोड़ रुपये नकद, चार लग्जरी वाहन और 19 एंड्रॉयड मोबाइल फोन शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 2.92 करोड़ रुपये से अधिक है। बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के तरीकों की जानकारी मिल सके।

बड़े नेटवर्क का हिस्सा था गिरोह

जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को निवेश के नाम पर आकर्षक ऑफर देते थे। वे खुद को बड़ी कंपनियों से जुड़ा हुआ बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे।

इसके बाद उन्हें अधिक मुनाफे का लालच देकर मोटी रकम निवेश करने के लिए तैयार किया जाता था। रकम मिलने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे और अलग-अलग जगहों पर छिप जाते थे।

अन्य पीड़ितों की तलाश जारी

पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि आरोपियों ने कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बनाया हो सकता है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी जानकारी जरूर लें और ज्यादा मुनाफे के लालच में बिना जांच-पड़ताल के निवेश न करें।

पुलिस टीम की बड़ी सफलता

एसपी अमित तोलानी ने इस कार्रवाई को पुलिस टीम की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच और लगातार प्रयासों के कारण अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंच बनाई जा सकी।

उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर और भी खुलासे होने की संभावना है।

ठगी के खिलाफ सतर्क रहने की जरूरत

बढ़ते साइबर और निवेश धोखाधड़ी के मामलों के बीच राजगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई लोगों के लिए एक चेतावनी भी है। ठग अक्सर ज्यादा मुनाफे का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

पुलिस का कहना है कि किसी भी निवेश से पहले कंपनी और योजना की विश्वसनीयता जांचना बेहद जरूरी है। फिलहाल ऑपरेशन मनी ट्रैप के तहत गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

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