250 रुपये MSP के बाद भी रबर किसानों की बढ़ी चिंता, उत्पादन घटने से संकट

Update: 2026-07-16 11:05 GMT

केरल: रबर किसानों के लिए सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 250 रुपये प्रति किलोग्राम घोषित किए जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार के पहले बजट में रबर के लिए घोषित इस समर्थन मूल्य से किसानों को राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन उत्पादन में आई गिरावट ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

जिले के रबर उत्पादकों का कहना है कि पिछले दो महीनों में उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। भीषण गर्मी और उसके बाद मानसून की शुरुआत के कारण रबर टैपिंग का काम बाधित हुआ, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

गर्मी और बारिश ने प्रभावित किया उत्पादन

रबर उत्पादन के लिए नियमित टैपिंग बेहद जरूरी होती है। लेकिन मार्च और अप्रैल में पड़ी तेज गर्मी के कारण कई क्षेत्रों में किसानों को टैपिंग रोकनी पड़ी। तापमान बढ़ने से पेड़ों से लेटेक्स का उत्पादन प्रभावित हुआ और कई किसानों ने सुरक्षा के लिहाज से टैपिंग बंद कर दी।

इसके बाद मई के अंत में मानसून के आगमन के साथ भी रबर उत्पादन की प्रक्रिया में बाधाएं आईं। लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण कई इलाकों में किसान नियमित रूप से टैपिंग नहीं कर पाए।

किसानों का कहना है कि उत्पादन में कमी का सीधा असर उनकी आय पर पड़ रहा है।

MSP से राहत की उम्मीद, लेकिन चिंता बरकरार

सरकार की ओर से रबर के लिए 250 रुपये प्रति किलोग्राम MSP की घोषणा को किसानों के लिए एक सकारात्मक कदम माना गया था। लंबे समय से रबर उत्पादक बेहतर कीमत और सरकारी सहायता की मांग कर रहे थे।

हालांकि, किसानों का कहना है कि केवल MSP घोषित करना पर्याप्त नहीं है। इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब खरीद व्यवस्था प्रभावी हो और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

किसानों को आशंका है कि यदि उत्पादन कम रहा और बाजार व्यवस्था मजबूत नहीं हुई तो MSP का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाएगा।

टैपिंग बंद होने से बढ़ी आर्थिक परेशानी

रबर किसानों की आय काफी हद तक नियमित टैपिंग पर निर्भर करती है। टैपिंग बंद होने से न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के सामने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने की चुनौती भी खड़ी हो गई।

कई किसानों ने बताया कि रबर के पेड़ों की देखभाल, मजदूरी और अन्य खर्च लगातार जारी रहते हैं, लेकिन उत्पादन कम होने से आमदनी घट जाती है।

किसानों ने उठाई प्रभावी व्यवस्था की मांग

रबर उत्पादकों का कहना है कि सरकार को MSP लागू करने के साथ-साथ खरीद व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। किसानों की मांग है कि प्राकृतिक आपदाओं, मौसम की मार और उत्पादन में गिरावट जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सहायता दी जाए।

किसानों का कहना है कि रबर खेती में मौसम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए सरकार को लंबे समय की योजना बनाकर काम करना चाहिए।

मानसून के बाद स्थिति सुधरने की उम्मीद

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान रबर उत्पादन में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। मौसम अनुकूल रहने पर आने वाले महीनों में टैपिंग की स्थिति बेहतर हो सकती है।

हालांकि, शुरुआती महीनों में हुए नुकसान की भरपाई करना किसानों के लिए चुनौती बनी हुई है।

सरकार के फैसले पर किसानों की नजर

रबर MSP को लेकर किसानों में उम्मीद और चिंता दोनों बनी हुई हैं। एक ओर उन्हें बेहतर कीमत मिलने की आशा है, वहीं दूसरी ओर कम उत्पादन और बाजार की स्थिति को लेकर वे चिंतित हैं।

अब किसानों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है कि MSP व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है और इसका लाभ वास्तविक रूप से रबर उत्पादकों तक कैसे पहुंचता है।

रबर किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान केवल कीमत बढ़ाने से नहीं, बल्कि उत्पादन, खरीद और मौसम संबंधी जोखिमों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने से ही संभव होगा

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