बाढ़ और भूस्खलन के बीच KSEB की बड़ी पहल, तीन दिन में बहाल की बिजली

Update: 2026-08-10 11:11 GMT

कोट्टायम। बाढ़ और भूस्खलन के कारण व्यापक नुकसान के बावजूद केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया। कठिन परिस्थितियों और कई स्थानों पर बुनियादी ढांचे को हुए भारी नुकसान के बीच बिजली विभाग की टीमों ने जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए तीन दिनों के भीतर कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी।

पूंजार, थीकोइ और एराट्टुपेट्टा जैसे इलाके भारी बारिश और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुए थे। कई स्थानों पर बिजली के खंभे और लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं, जिसके कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। इसके बावजूद KSEB की टीमों ने जोखिम उठाते हुए मरम्मत कार्य किया और प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल करने की दिशा में तेजी से काम किया।

पाला सर्कल में सबसे ज्यादा नुकसान

बाढ़ और भूस्खलन से पाला सर्कल सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रहा। इस सर्कल के अंतर्गत पूंजार और एराट्टुपेट्टा समेत कई इलाके आते हैं। शनिवार तक KSEB के प्रारंभिक आकलन के अनुसार पाला सर्कल के तहत आने वाले 21 इलेक्ट्रिकल सेक्शन में एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

बिजली के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान में बिजली के खंभों, तारों, ट्रांसफार्मरों और अन्य उपकरणों को नुकसान शामिल है। कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण विद्युत लाइनें टूट गईं या उनके आसपास की जमीन खिसक गई। ऐसे इलाकों में मरम्मत कार्य करना कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।

जिले में 1.75 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

KSEB के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक पूरे जिले में बिजली व्यवस्था को करीब 1.75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा अभी प्रारंभिक है और प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत निरीक्षण पूरा होने के बाद इसमें बदलाव संभव है।

अधिकारियों के अनुसार, बारिश और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन अलग-अलग विद्युत सेक्शनों के स्तर पर किया जा रहा है। क्षतिग्रस्त उपकरणों और लाइनों की पहचान कर उनकी मरम्मत या प्रतिस्थापन का काम जारी है।

तीन दिन में बहाल की गई आपूर्ति

आपदा की स्थिति में KSEB के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिजली आपूर्ति को जल्द से जल्द बहाल करना थी। कई इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त होने और भूस्खलन के कारण रास्ते बंद होने से मरम्मत दलों को मौके तक पहुंचने में कठिनाई हुई।

इसके बावजूद विभाग ने जरूरी सेवाओं वाले क्षेत्रों और अधिक प्रभावित इलाकों को प्राथमिकता दी। कर्मचारियों ने उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए क्षतिग्रस्त लाइनों और उपकरणों की मरम्मत शुरू की।

लगातार प्रयासों के बाद तीन दिनों के भीतर कई प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। इससे स्थानीय लोगों और राहत कार्यों में जुटी एजेंसियों को बड़ी राहत मिली।

आपदा के बीच जोखिम उठाकर किया काम

भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाल करना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है। जमीन खिसकने और लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर दोबारा भूस्खलन का खतरा बना रहता है। ऐसे में बिजली कर्मचारियों को सुरक्षा का ध्यान रखते हुए मरम्मत कार्य करना पड़ा।

कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों और खंभों को हटाकर नए खंभे लगाने पड़े। जहां संभव था, वहां क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गई। विभाग ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान सुरक्षा मानकों का भी ध्यान रखा।

जरूरी सेवाओं को दी गई प्राथमिकता

बिजली आपूर्ति बहाल करने के दौरान KSEB ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया। अस्पतालों, राहत शिविरों, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आवश्यक सेवाओं को बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए।

आपदा के दौरान बिजली का महत्व और बढ़ जाता है। राहत और बचाव कार्यों के लिए संचार व्यवस्था, पानी की आपूर्ति और चिकित्सा सेवाओं के संचालन में बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में जल्द बिजली बहाल होने से राहत कार्यों को भी गति मिली।

स्थानीय लोगों को मिली राहत

लगातार बारिश और भूस्खलन से परेशान स्थानीय लोगों के लिए बिजली आपूर्ति की बहाली बड़ी राहत साबित हुई। कई परिवारों को आपदा के कारण पहले ही घरों और संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा था। ऐसे में बिजली कटौती से उनकी मुश्किलें और बढ़ रही थीं।

बिजली बहाल होने के बाद लोगों को मोबाइल चार्जिंग, संचार, घरेलू जरूरतों और अन्य आवश्यक कार्यों में सुविधा मिली। राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में भी बिजली की उपलब्धता से व्यवस्था बेहतर हुई।

नुकसान की भरपाई में लगेगा समय

हालांकि कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है, लेकिन बाढ़ और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त विद्युत बुनियादी ढांचे की पूरी तरह मरम्मत में समय लग सकता है। विभाग की टीमें अभी भी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं।

KSEB के सामने अब क्षतिग्रस्त उपकरणों और बिजली नेटवर्क को स्थायी रूप से दुरुस्त करने की चुनौती है। इसके लिए अतिरिक्त संसाधनों और वित्तीय प्रावधान की आवश्यकता होगी।

आपदा प्रबंधन में बिजली विभाग की अहम भूमिका

बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं के दौरान बिजली विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से प्रभावित लोगों की परेशानियां बढ़ती हैं और राहत कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।

ऐसे में KSEB के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा तीन दिनों के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल करना विभाग की तत्परता को दर्शाता है। हालांकि जिले में करीब 1.75 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान सामने आया है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को जल्द पटरी पर लाने से लोगों को बड़ी राहत मिली है।

फिलहाल KSEB की टीमें क्षतिग्रस्त नेटवर्क की मरम्मत और शेष समस्याओं को दूर करने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में विस्तृत सर्वे के बाद नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आने की उम्मीद है।

Tags:    

Similar News